महाकुंभ: Rahul Gandhi को हिंदू धर्म से बाहर निकालने की मांग, जाने क्या है पूरा मामला

एक महीने में सफाई देने की मांग
महाकुंभ: Rahul Gandhi को हिंदू धर्म से बाहर निकालने की मांग, जाने क्या है पूरा मामला
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नई दिल्ली - प्रयागराज महाकुंभ में रविवार को एक धर्म संसद आयोजित की गई। धर्म संसद के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को लेकर एक प्रस्ताव पास हुआ है। उनके एक बयान को लेकर कहा गया कि उस बयान से लोगों को पीड़ा हुई है।

सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आधिकारिक हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया। पोस्ट में लिखा गया कि राहुल गांधी को एक महीने के भीतर अपना पक्ष रखना होगा। इसके साथ ही आगे लिखा गया ‌कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उन्हें हिंदू धर्म से बहिष्कृत करने की घोषणा कर दी जाएगी।

क्या था बयान ?

धर्म संसद में राहुल गांधी के उस बयान की चर्चा हुई जिसमें वह मनुस्मृति को लेकर अपनी बात रख रहे थे। राहुल गांधी ने यह बयान लोकसभा में हाथरस गैंगरेप की घटना का जिक्र करते वक्त दिया था। उन्होंने कहा था कि जिसने रेप किया वो बाहर घूम रहे हैं और लड़की का परिवार घर में बंद है। लड़की का परिवार बाहर नहीं जा सकता क्योंकि जो अपराधी हैं वो उन्हें डराते धमकाते हैं।

ये संविधान में कहा लिखा है कि जो बलात्कार करते हैं वो बाहर घूमें और जिसका बलात्कार हुआ वो घर में रहे। इतना कहने के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि यह आपकी किताब मनुस्मृति में लिखा होगा लेकिन संविधान में नहीं लिखा। राहुल गांधी के इसी बयान के खिलाफ धर्मासद विकास पाटनी ने निंदा प्रस्ताव रखा।

क्या कहा शंकराचार्य ने ?

इस पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि "सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक वीडियो क्लिप में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को इस आशय का वक्तव्य कहते दिखाया जा रहा है कि मनुस्मृति बलात्कारियों को संरक्षण देती है। इससे मनुस्मति का पवित्र ग्रंथ मानने वाले करोड़ों आस्थावान लोगों को बड़ी पीड़ा हुई है।  परम संसद 1008 राहुल गांधी के इस वक्तव्य की घोर निंदा करती है। तथा अपने आशय को स्पष्ट करने या क्षमा याचना की मांग करती है। शंकराचार्य ने कहा कि महीने भर के अंदर अगर राहुल गांधी ने अपना पक्ष नहीं रखा तो उनको हिन्दू धर्म से बहिष्कृत कर दिया जाएगा।"

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