स्थानांतरण नीति के पारदर्शी एवं समान क्रियान्वयन की मांग को लेकर लिविंग ऑन द एज ने प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की

स्थानांतरण नीति के पारदर्शी एवं समान क्रियान्वयन की मांग को लेकर लिविंग ऑन द एज ने प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : लिविंग ऑन द एज तथा हिंदू सेवा संघ के अध्यक्ष अभय कुमार ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के मुख्य सचिव तथा सांसद को एक ज्ञापन सौंपकर विभिन्न सरकारी विभागों में स्थानांतरण आदेशों के निष्पक्ष, पारदर्शी और समान क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु हस्तक्षेप की मांग की है। अपने ज्ञापन में उन्होंने प्रशासन द्वारा अंतिम स्थानांतरण आदेश जारी करने से पूर्व मसौदा स्थानांतरण सूची जारी करने की हालिया पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि मसौदा सूची जारी होने से सरकारी कर्मचारियों को चिकित्सा संबंधी समस्याओं, बच्चों की शिक्षा, पति-पत्नी की नियुक्ति, पारिवारिक जिम्मेदारियों और अन्य कठिनाइयों के आधार पर अपनी आपत्तियां एवं अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। हालांकि उन्होंने यह भी इंगित किया कि कुछ मामलों में सरकारी कर्मचारियों के नाम मसौदा सूची में शामिल नहीं थे, लेकिन बाद में उन्हें अंतिम स्थानांतरण आदेशों में शामिल कर दिया गया। इससे संबंधित कर्मचारियों को अपनी समस्याएं अथवा अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिल पाया, जिससे उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और मसौदा स्थानांतरण प्रणाली का उद्देश्य भी प्रभावित हुआ। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि प्रशासन द्वारा 16 मार्च, 2026 को जारी परिपत्र के बावजूद कई विभागों में स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया अभी तक पूर्ण नहीं हुई है। जबकि कुछ विभागों ने इस नीति को काफी हद तक लागू किया है, वहीं कुछ विभागों में इसे आंशिक रूप से लागू किया गया है अथवा प्रक्रिया अभी भी लंबित है, जिससे कर्मचारियों के बीच असमानता और भेदभाव की भावना उत्पन्न हो रही है। अभय कुमार ने प्रशासन से अनुरोध किया कि सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि किसी भी सरकारी कर्मचारी का नाम अंतिम स्थानांतरण आदेश में शामिल करने से पहले उसे मसौदा सूची में प्रदर्शित किया जाए, सिवाय अत्यंत आवश्यक प्रशासनिक परिस्थितियों के। उन्होंने यह भी मांग की कि अंतिम स्थानांतरण आदेश जारी करने से पूर्व प्रभावित कर्मचारियों को पर्याप्त अवसर दिया जाए ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। इसके अलावा जिन कर्मचारियों को मसौदा सूची में शामिल किए बिना सीधे अंतिम आदेश में स्थानांतरित किया गया है, उनके मामलों की समीक्षा कर उन्हें अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जाए।

उन्होंने सभी विभागों से प्रशासन के 16 मार्च के परिपत्र का सख्ती से पालन करने, स्थानांतरण एवं पदस्थापन प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरा करने तथा निर्धारित सात दिन की कार्यमुक्ति अवधि का पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की। ज्ञापन में स्थानांतरण नीति के सभी विभागों में समान रूप से क्रियान्वयन की आवश्यकता पर भी बल दिया गया, ताकि पारदर्शिता, समानता तथा प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित की जा सके। अभय कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन द्वारा समय पर हस्तक्षेप किए जाने से कर्मचारियों का स्थानांतरण प्रक्रिया में विश्वास मजबूत होगा तथा प्राकृतिक न्याय एवं सुशासन के सिद्धांतों को बढ़ावा मिलेगा।

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