

दिल्ली, इंद्राणी : पश्चिम बंगाल पुलिस के नए डीजी (पुलिस महानिदेशक) की नियुक्ति को लेकर कानूनी जटिलताएं और बढ़ गई हैं। डीजी नियुक्ति से जुड़े सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। यूपीएससी का कहना है कि कैट का आदेश सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के खिलाफ है। इसके चलते राजीव कुमार के बाद राज्य का अगला डीजी कौन होगा, इसे लेकर अनिश्चितता गहराती जा रही है।
फिलहाल पश्चिम बंगाल पुलिस में कोई स्थायी डीजी नहीं है। आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार कार्यवाहक डीजी के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राजीव कुमार का 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होना तय है। ऐसे में दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित यह मामला डीजी नियुक्ति प्रक्रिया को और जटिल बना सकता है। कैट ने 21 जनवरी को दिए अपने अंतरिम आदेश में राज्य सरकार को 23 जनवरी तक प्रस्तावित आठ अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही कैट ने यूपीएससी को 28 जनवरी तक एम्पैनलमेंट कमेटी की बैठक बुलाने और 29 जनवरी तक तीन नामों की सूची राज्य सरकार को सौंपने का आदेश दिया था, जिनमें से एक को डीजी नियुक्त किया जाना था।
हालांकि, इसी आदेश को चुनौती देते हुए यूपीएससी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि डीजी नियुक्ति प्रक्रिया को राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यूपीएससी ने 2006 के प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया है। आयोग का तर्क है कि कैट द्वारा तय की गई समय-सीमा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन करती है
गौरतलब है कि राज्य के अंतिम स्थायी डीजी मनोज मालवीय 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद से राजीव कुमार ही कार्यवाहक डीजी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कैट के निर्देश के अनुसार राज्य सरकार द्वारा यूपीएससी को भेजी गई सूची में राजीव कुमार के अलावा राजेश कुमार, रणबीर कुमार, देवाशीष राय, अनुज शर्मा, जगमोहन, एन. रमेश बाबू और सिद्धिनाथ गुप्ता के नाम शामिल हैं।