जीएनआई परियोजना प्रभावितों के मुआवजा और पुनर्वास मुद्दा उठा लोकसभा में

जीएनआई प्रोजेक्ट से प्रभावितों के लिए न्याय की मांग तेज
जीएनआई परियोजना प्रभावितों के मुआवजा और पुनर्वास मुद्दा उठा लोकसभा में
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने लोकसभा के शून्यकाल के दौरान ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित मेगा परियोजना के संबंध में कैंपबेल बे के गांधी नगर और शास्त्री नगर में प्रभावित परिवारों के लिए राहत एवं पुनर्वास पैकेज का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। यह परियोजना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा विकसित की जा रही है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक प्रमुख व्यापारिक और रणनीतिक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है, जो सिंगापुर और हांगकांग जैसे स्थापित केंद्रों को भी पीछे छोड़ने की क्षमता रखता है। सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए रे ने कहा कि इस बड़े परियोजना के क्रियान्वयन से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन परिवारों को उचित और पर्याप्त मुआवजा तथा समुचित पुनर्वास सुविधा प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने आगे आग्रह किया कि मुआवजा और पुनर्वास ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ के प्रावधानों के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए। इसमें भूमि का उचित मूल्यांकन प्रति हेक्टेयर 1.50 करोड़ रुपये के अनुसार किया जाए तथा घर, बागान और आजीविका के नुकसान के लिए भी समुचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने दिल्ली में जीएमआर परियोजना जैसे पूर्व उदाहरणों का हवाला देते हुए न्यायसंगत मुआवजे की मांग की। अंत में सांसद रे ने प्रधानमंत्री से विनम्र अपील की कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक और न्यायसंगत पुनर्वास पैकेज प्रदान किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन परिवारों में से कई को पहले ही सरकार द्वारा पुनर्वास योजनाओं के तहत बसाया गया था और वे 2004 की हिंद महासागर सुनामी जैसी बड़ी आपदाओं का भी सामना कर चुके हैं।

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