श्रीलंका ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को देश में उतरने से रोका

स्विट्जरलैंड के बाद श्रीलंका ने इजराइल-ईरान जंग में अपनी जमीन और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर लगाई रोक, अमेरिका के साथी कई यूरोपीय देशों ने भी जंग से बनाई दूरी
Israel-Iran Conflict
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके।
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कोलंबो : ‌ईरान-इजराइल संघर्ष (मध्य पूर्व युद्ध) में एक और देश-श्रीलंका ने अमेरिका को उसके सैन्य अभियानों के लिए अपनी जमीन और हवाई क्षेत्र (Airspace) का उपयोग करने से मना कर दिया है। इसके पहले स्विट्जरलैंड ने इस मामले में अमेरिका को दो टूक सुना दी थी।

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने शुक्रवार को देश की संसद को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने 26 फरवरी को अनुरोध किया था कि जिबूती बेस से 2 मिसाइल लदे लड़ाकू विमानों को 4 से 8 मार्च के बीच मटाला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात किया जाए। उन्होंने कहा कि हमने साफ मना कर दिया।

ईरान ने भी मांगी थी श्रीलंका से मदद

उन्होंने बताया कि अमेरिका ही नहीं ईरान ने भी उनसे इस मामले में मदद मांगी थी। उन्होंने कहा कि 26 फरवरी को ही इरान ने भी अपने तीन युद्धपोतों को श्रीलंका आने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने कहा कि अगर हम ईरान को अनुमति देते, तो हमें अमेरिका को भी देनी पड़ती। इसलिए मैने दोनों देशों को इसके लिए मना कर दिया।

यूरोपीय देशों ने अमेरिका से बनाई दूरी

इस संघर्ष में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, इटली और ग्रीस जैसे प्रमुख अमेरिकी सहयोगियों ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में मदद करने से इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिका इस तनावपूर्ण स्थिति में लगभग अलग-थलग पड़ गया है।

श्रीलंका ने हाल ही में दोनों देशों की मदद की

राष्ट्रपति ने बताया कि 4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी हमले में ईरानी जहाज IRIS देना डूब गया, जिसमें 84 नाविकों की मौत हो गई। हालांकि इस दौरान श्रीलंका की नौसेना ने 32 लोगों को बचा कर उन्हें उनके सकुशल उनके देश रवाना कर दिया है। इसी तरह बाद में एक अन्य ईरानी जहाज IRIS बुशहर को मानवीय आधार पर श्रीलंका में प्रवेश दिया गया, ताकि उसके 200 से ज्यादा नाविकों की जान बचाई जा सके।

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