

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली : भारत ने समुद्री प्रदूषण नियंत्रण और समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के पहले स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र को समर्पित किया। इसे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित यह पोत लगभग 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से तैयार किया गया है। ‘समुद्र प्रताप’ न केवल भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है, बल्कि यह तटरक्षक बल के बेड़े का अब तक का सबसे बड़ा जहाज भी है। इसके शामिल होने से समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, पर्यावरण संरक्षण और समुद्री सुरक्षा अभियानों में तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पोत भारत के विकसित होते रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र का उदाहरण है, जो अब जटिल विनिर्माण चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो चुका है। उन्होंने कहा कि रक्षा पोतों में स्वदेशी सामग्री के उपयोग को आने वाले समय में 90 प्रतिशत तक ले जाने के प्रयास जारी हैं।
हालांकि ‘समुद्र प्रताप’ को विशेष रूप से प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार किया गया है, लेकिन इसकी भूमिका केवल इसी तक सीमित नहीं है। एक ही मंच पर कई क्षमताओं के एकीकरण से यह पोत तटीय गश्त और समुद्री निगरानी में भी उपयोगी सिद्ध होगा, जिससे समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
राजनाथ सिंह ने समुद्री प्रदूषण नियंत्रण, तटीय स्वच्छता, खोज एवं बचाव और समुद्री कानून प्रवर्तन में भारतीय तटरक्षक बल की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि तटरक्षक बल की सक्रिय मौजूदगी यह स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है।
यह पोत उन्नत प्रदूषण पहचान प्रणालियों, समर्पित प्रदूषण प्रतिक्रिया नौकाओं और आधुनिक अग्निशमन सुविधाओं से लैस है। इसमें हेलीकॉप्टर हैंगर और विमानन सहायता सुविधाएं भी शामिल हैं, जिससे दूरदराज समुद्री क्षेत्रों में इसकी परिचालन क्षमता बढ़ेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह पोत खराब समुद्री परिस्थितियों में भी स्थिर रूप से संचालन करने में सक्षम है।
रक्षा मंत्री ने समुद्री पर्यावरण संरक्षण को जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान के संदर्भ में एक रणनीतिक आवश्यकता के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ तेल रिसाव जैसी घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया के जरिए प्रवाल भित्तियों, मैंग्रोव, मत्स्य संसाधनों और समुद्री जैव विविधता को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करेगा। इससे तटीय समुदायों और समुद्री अर्थव्यवस्था की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।