ऑनलाइन प्रक्रिया में नए मतदाता के पंजीकरण फॉर्म और घोषणा पत्र को अलग किया गया

New Delhi
पंजीकरण फॉर्म और घोषणा पत्र को अलग किया गया
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नयी दिल्ली : निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे के अनुरूप, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया वाले राज्यों में नए मतदाता के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म और उसके साथ संलग्न घोषणा पत्र को ऑनलाइन प्रक्रिया में अलग-अलग कर दिया है।

आयोग ने सितंबर में उन राज्यों में अपने डिजिटल मंच से घोषणा पत्र को पहले ही हटा दिया था, जहां मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पूरा हो चुका है। मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के इच्छुक लोगों को फॉर्म-6 भरना होता है।

बिहार में SIR के बाद निर्वाचन आयोग ने इसके साथ एक घोषणा पत्र भी जोड़ दिया था, जिसमें फॉर्म-6 भरने वाले आवेदकों से उनके माता-पिता के SIR संबंधी विवरण मांगे गए थे। हालांकि, ऑफलाइन प्रक्रिया में दोनों दस्तावेज अलग-अलग भरने होते हैं, लेकिन ऑनलाइन व्यवस्था में दोनों के लिए एक ही OTP का इस्तेमाल किए जाने से यह सवाल उठने लगा था कि क्या आयोग ने केंद्रीय कानून मंत्रालय की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव किया है?

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि निर्धारित वैधानिक फॉर्म-6 और पहले से इस्तेमाल किए जा रहे घोषणा पत्र को जमा करने की प्रक्रिया में संशोधन किया गया है।

आयोग के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, ‘पहले आवेदकों की सुविधा के लिए फॉर्म-6 और उसके साथ संलग्न घोषणा पत्र एक ही OTP और ई-साइन के जरिए जमा किए जाते थे। संशोधित प्रक्रिया के तहत अब दोनों दस्तावेज अलग-अलग जमा करने होंगे और इसके लिए अलग-अलग OTP सत्यापन तथा ई-साइन की आवश्यकता होगी।

आवेदन सफलतापूर्वक जमा करने के लिए आवेदकों को दोनों प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।’ सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में आयोग ने कहा था कि उसके मतदाता सूची प्रभाग ने 21 अक्टूबर को यह निर्णय लिया है कि भौतिक रूप से आवेदन जमा करने की प्रक्रिया की तरह ऑनलाइन फॉर्म-6 के आवेदन को भी 2 अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा।

इनमें नियमों के तहत निर्धारित फॉर्म-6 और SIR घोषणा पत्र शामिल होंगे। आयोग ने मंगलवार को स्पष्ट किया था कि पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत लोग भी SIR की मसौदा मतदाता सूची में अपना नाम नहीं होने पर उसे शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

यह स्पष्टीकरण ऐसे मतदाताओं की चिंताओं के बीच आया है, जिनके नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज थे। उन्हें आशंका थी कि फॉर्म-6 जमा करने पर वे गलत घोषणा करने के दोषी करार दिए जा सकते हैं और उन पर निर्वाचन कानून के प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

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