बजट सत्र में बंगाल का बकाया बनेगा तृणमूल का बड़ा हथियार, संसद के भीतर-बाहर आंदोलन तय

संसद के आगामी बजट सत्र में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पश्चिम बंगाल के करीब दो लाख करोड़ रुपये के बकाये के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।
बजट सत्र में बंगाल का बकाया बनेगा तृणमूल का बड़ा हथियार, संसद के भीतर-बाहर आंदोलन तय
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दिल्ली | इंद्राणी

संसद के आगामी बजट सत्र में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पश्चिम बंगाल के करीब दो लाख करोड़ रुपये के बकाये के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी। 100 दिनों के काम से लेकर आवास योजना समेत विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में राज्य के लंबित बकाये की वसूली को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया है। बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह इस मुद्दे पर आंदोलन करेगी। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा संचालित एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में कथित पारदर्शिता की कमी का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया जाएगा।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि पिछली शीतकालीन सत्र की तरह इस बार भी संसद में प्रतिदिन बंगाल के बकाये और एसआईआर की अपारदर्शिता को लेकर लगातार धरना और मार्च किए जाएंगे। 2026-27 के केंद्रीय बजट में चुनाव की ओर बढ़ रहे पश्चिम बंगाल के लिए केंद्र सरकार क्या आवंटन करती है, इस पर भी तृणमूल की नजर रहेगी। हालांकि पार्टी का मुख्य एजेंडा “बंगाल के साथ हो रही कथित वंचना” ही रहेगा।

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं में जांच के नाम पर धन रोककर राज्य के गरीब लोगों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है। यही मुद्दा आने वाले चुनावों में भी पार्टी का अहम हथियार होगा। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चार पत्र लिखे हैं, जिनका अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इससे पार्टी में नाराजगी है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान तृणमूल सांसद इन मुद्दों को संसद में उठाएंगे, वहीं बाहर धरना और प्रदर्शन भी करेंगे।

वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कई केंद्रीय योजनाओं में गंभीर भ्रष्टाचार सामने आया है। जांच पूरी होने और क्लियरेंस मिलने तक राशि जारी नहीं की जाएगी। इसके जवाब में तृणमूल का तर्क है कि कुछ जिलों की अनियमितताओं के कारण पूरे राज्य की राशि रोकना अन्याय है, जिससे गरीब लोग अपने हक से वंचित हो रहे हैं।

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