गर्मी के मौसम में बार-बार उत्पन्न होने वाले जल संकट पर एचआरएस ने जताई चिंता

गर्मी के मौसम में बार-बार उत्पन्न होने वाले जल संकट पर एचआरएस ने जताई चिंता
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : दक्षिण अंडमान के निवासियों द्वारा झेले जा रहे बार-बार के जल संकट के स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए हिंदू राष्ट्र शक्ति ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन से द्वीपों में दीर्घकालिक और टिकाऊ जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने की मांग की है। उपराज्यपाल, सांसद, मुख्य सचिव तथा दक्षिण अंडमान के उपायुक्त को सौंपे गए एक ज्ञापन में संगठन ने हर वर्ष होने वाली जल कमी से लोगों को होने वाली कठिनाइयों का उल्लेख किया और कहा कि बढ़ती जल मांग को पूरा करने के लिए केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। हिंदू राष्ट्र शक्ति के राज्य महासचिव (संगठन) एवं श्री विजयापुरम नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष एन.के. उदया कुमार द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि गर्मी के मौसम के दौरान बार-बार उत्पन्न होने वाला जल संकट इस बात का संकेत है कि मजबूत आधारभूत संरचना और बेहतर योजना की तत्काल आवश्यकता है। संगठन ने अतिरिक्त बांधों के निर्माण तथा जल भंडारण क्षमता बढ़ाने वाली वैकल्पिक परियोजनाओं को मजबूत करने की मांग की, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी विश्वसनीय जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों के कारण बड़ी मात्रा में शुद्ध पेयजल रिसाव के माध्यम से नष्ट हो रहा है। संगठन ने प्रशासन से पुरानी पाइपलाइनों की मरम्मत और प्रतिस्थापन के लिए एक व्यवस्थित कार्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे जल की बर्बादी कम होगी और वितरण व्यवस्था की कार्यक्षमता में सुधार आएगा। उदया कुमार ने उपलब्ध जल संसाधनों के समान वितरण तथा जल दबाव की उचित निगरानी के महत्व पर भी बल दिया। ज्ञापन के अनुसार बाथू बस्ती, डॉलीगंज और गराचरमा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के निवासी अक्सर पर्याप्त जल आपूर्ति न मिलने तथा कम दबाव की शिकायत करते हैं, जबकि वितरण प्रणाली के माध्यम से पानी छोड़ा जाता है। संगठन का कहना है कि ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए नियमित निगरानी और मौजूदा जल वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण आवश्यक है। ज्ञापन में कहा गया कि जल आपूर्ति का मुद्दा सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और लोगों के जीवन की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रशासन को केवल आपातकालीन परिस्थितियों में राहत उपाय अपनाने के बजाय दीर्घकालिक और टिकाऊ दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

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