

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम - अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में लगातार बढ़ते हवाई किरायों और उड़ानों की उपलब्धता में कमी के खिलाफ आगामी 3 सितंबर को सुबह 8:30 बजे एयरपोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की गई है। इस प्रदर्शन को जनहित से जुड़ा कार्यक्रम बताया गया है, जिसका उद्देश्य द्वीपवासियों, मरीजों, पर्यटकों तथा नियमित हवाई संपर्क पर निर्भर व्यवसायों के सामने उत्पन्न हो रही कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाना है।
प्रदर्शन की घोषणा करते हुए अंडमान निकोबार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अभियान समिति के अध्यक्ष टीएसजी भास्कर ने बताया कि प्रदर्शन में शामिल लोग काली पट्टी या काला बैज पहनकर एयरपोर्ट के बाहर एकत्र होंगे और वर्तमान में लागू अत्यधिक हवाई किरायों को उजागर करने के लिए वास्तविक हवाई टिकटों की बड़ी प्रतियां प्रदर्शित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण और मौन रखा जाएगा तथा इसका उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना नहीं होगा।
भास्कर ने कहा कि हवाई किराये आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। उन्होंने अपनी हाल की चेन्नई से द्वीपों की यात्रा का उदाहरण देते हुए बताया कि इसके लिए उन्होंने लगभग 17,500 रुपये का भुगतान किया। उन्होंने सवाल उठाया कि सामान्य परिवार इतने अधिक किराये का भुगतान कैसे कर सकते हैं, विशेषकर तब जब किसी व्यक्ति को इलाज या किसी अन्य जरूरी कार्य के लिए मुख्य भूमि की यात्रा करनी हो।
उन्होंने आरोप लगाया कि मांग बनी रहने के बावजूद उड़ानों की उपलब्धता में भी भारी कमी आई है। उनके अनुसार पर्यटन सीजन के दौरान कुछ मार्गों पर अपेक्षित उड़ानों की संख्या काफी कम कर दी गई है और कुछ दिनों में केवल चार या पांच उड़ानें ही संचालित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मांग और उपलब्धता के बीच बढ़ते अंतर के कारण हवाई किरायों में तेज वृद्धि हो रही है।
भास्कर ने कहा कि हवाई संपर्क में कमी का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है। होटल, टैक्सी और निजी वाहन संचालक, ऑटो-रिक्शा चालक, नाव संचालक, रेस्तरां, गाइड, सब्जी और मछली आपूर्तिकर्ता, वितरण कर्मी तथा पर्यटन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कई छोटे व्यवसाय इससे प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यटन को केवल होटलों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे द्वीपों में आर्थिक गतिविधियों की एक बड़ी श्रृंखला चलती है। उनके अनुसार जब पर्यटकों का आगमन कम होता है तो इसका असर परिवहन संचालकों, नाव मालिकों, चालकों, श्रमिकों, आपूर्तिकर्ताओं और अन्य व्यवसायों पर भी पड़ता है। उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहने पर द्वीपों में रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पर्यटकों की आवाजाही में कमी का असर इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य और वितरण सेवाओं पर भी पड़ रहा है तथा व्यवसायों और वितरण कर्मियों की गतिविधियां घट रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन द्वीपों में सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है और मौजूदा स्थिति लंबे समय तक जारी रहने पर इसका व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्य भूमि के साथ हवाई संपर्क की तुलना करते हुए भास्कर ने कहा कि मुख्य भूमि के लोगों के पास रेल और व्यापक सड़क नेटवर्क जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जबकि द्वीपवासियों के पास ऐसे विकल्प नहीं हैं और वे मुख्य रूप से हवाई तथा समुद्री परिवहन पर निर्भर हैं। उन्होंने विशेष रूप से छुट्टियों के व्यस्त समय के बाहर यात्री जहाजों की सीमित उपलब्धता पर भी चिंता व्यक्त की।
भास्कर ने कहा कि उनके अनुभव में मौजूदा स्थिति अभूतपूर्व है और दावा किया कि कोविड-19 के दौर में भी उड़ानों का संचालन वर्तमान स्तर तक नहीं गिरा था। उन्होंने पिछले वर्ष सितंबर के पहले सप्ताह में अधिक संख्या में उड़ानों के संचालन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान कमी से स्थानीय निवासियों और पर्यटन उद्योग दोनों के सामने गंभीर कठिनाइयां पैदा हो रही हैं।
उन्होंने मुख्य भूमि में विशेष चिकित्सा उपचार के लिए जाने वाले मरीजों की परेशानियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से बीमार और स्ट्रेचर पर यात्रा करने वाले मरीजों के लिए परिवहन का खर्च बेहद अधिक हो सकता है और प्रशासन को ऐसे मरीजों के लिए आर्थिक सहायता पर विचार करना चाहिए।
भास्कर ने प्रशासन को चार्टर उड़ानों या एयरलाइनों में निश्चित किराये पर सीटों का एक निर्धारित हिस्सा सुरक्षित रखने जैसे विकल्प तलाशने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन एयरलाइनों से पहले से निश्चित संख्या में सीटें खरीदकर उन्हें द्वीपवासियों के लिए नियंत्रित किराये पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर विचार कर सकता है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष के रूप में अपने पूर्व कार्यकाल का उल्लेख करते हुए श्री भास्कर ने कहा कि पहले भी चार्टर उड़ानों की व्यवस्था शुरू करने के प्रयास किए गए थे, हालांकि बाद में निविदा रद्द कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि द्वीपों को सस्ती और भरोसेमंद हवाई कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था की आवश्यकता है और केवल पर्यटन सीजन में उड़ानों की संख्या बढ़ाने पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।
3 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन के संबंध में श्री भास्कर ने कहा कि कार्यक्रम लगभग दो घंटे तक सीमित रहेगा और इसका उद्देश्य जनता की नाराजगी को सामने लाने तथा अधिकारियों पर समस्या के समाधान के लिए दबाव बनाने के लिए विरोध दर्ज कराना है। उन्होंने कहा कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यह प्रदर्शन अंतिम कदम नहीं होगा और आगे की कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
उन्होंने चैंबर ऑफ कॉमर्स तथा अन्य प्रमुख संगठनों से इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर सकता है और ऐसी दीर्घकालिक व्यवस्था की मांग कर सकता है, जिससे आने वाले वर्षों में इस प्रकार का हवाई किराया संकट दोबारा उत्पन्न न हो।
3 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भास्कर ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम कांग्रेस पार्टी की पहल पर आयोजित किया जा रहा है, लेकिन इसे पार्टी के बैनर या झंडों के तहत आयोजित नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित विभिन्न संगठनों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है और जोर देकर कहा कि कार्यक्रम किसी राजनीतिक आयोजन के बजाय जनहित के मुद्दे को उठाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने परिवहन संचालकों, पर्यटन व्यवसायों, विभिन्न संगठनों और आम जनता से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने द्वीपवासियों से अपने परिवारों के साथ 3 सितंबर के कार्यक्रम में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल पर्यटकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस निवासी से जुड़ा है जो द्वीपों और मुख्य भूमि के बीच सस्ती और भरोसेमंद परिवहन व्यवस्था पर निर्भर है।