हवाई किरायों के खिलाफ अभियान तेज, सांसद, उपराज्यपाल से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल

हितधारकों ने रियायती किरायों और उड़ानें बढ़ाने की मांग
हवाई किरायों के खिलाफ अभियान का नेतृत्व कर रहे टी एस जी भास्कर का चित्र।
हवाई किरायों के खिलाफ अभियान का नेतृत्व कर रहे टी एस जी भास्कर का चित्र।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम - हवाई किरायों में लगातार बढ़ोतरी और उड़ानों की कम होती संख्या के खिलाफ आयोजित सफल विरोध प्रदर्शन के बाद अभियान को आगे बढ़ाते हुए अंडमान निकोबार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अभियान समिति के अध्यक्ष टी एस जी भास्कर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अब सांसद, उपराज्यपाल और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात करने की तैयारी कर रहा है। इस अभियान में पर्यटन, मत्स्य पालन, परिवहन और अन्य संबंधित क्षेत्रों के हितधारक भी शामिल हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए टी एस जी भास्कर ने कहा कि हाल ही में आयोजित विरोध प्रदर्शन को लोगों का व्यापक समर्थन मिला और प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के निदेशक, नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव तथा अंडमान निकोबार प्रशासन के मुख्य सचिव से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि तीनों अधिकारियों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और अधिकारियों ने इस समस्या की गंभीरता को समझा है।

उन्होंने कहा कि हवाई किरायों और उड़ानों की कमी का प्रभाव केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर द्वीपों की पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। मछुआरों से लेकर ऑटो चालक, कैब चालक, ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर, स्कूबा डाइविंग संचालक, अंतिम छोर तक सेवाएं देने वाले लोग और यहां तक कि कपड़े धोने वाले लोगों तक पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा औद्योगिक और आर्थिक मुद्दा बन चुका है।

टी एस जी भास्कर ने कहा कि इस समस्या के दो प्रमुख पक्ष हैं। पहला पर्यटन क्षेत्र है, जबकि दूसरा द्वीपवासियों की यात्रा और अन्य आधारभूत ढांचे से जुड़ी जरूरतें हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में द्वीपवासियों को अत्यधिक किराया देना पड़ रहा है, जिसके कारण आम लोगों के साथ-साथ पर्यटन से जुड़े व्यवसायों पर भी भारी दबाव पड़ रहा है।

उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन एयरलाइनों से प्रत्येक उड़ान में लगभग 25 सीटें पहले से खरीद सकता है और इन्हें द्वीपवासियों के लिए रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने जहाजों के टिकट पर प्रशासन द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का उदाहरण देते हुए कहा कि बैठकों के दौरान यह जानकारी सामने आई कि एक तरफ के जहाज टिकट पर लगभग 7,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।

अपने प्रस्ताव को समझाते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी टिकट की कीमत लगभग 12,000 रुपये है, तो यात्री से केवल 5,000 रुपये लिए जाएं और शेष राशि को सब्सिडी के माध्यम से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था से द्वीपवासियों को तत्काल राहत मिल सकती है और अत्यधिक हवाई किरायों का बोझ कम किया जा सकता है।

टी एस जी भास्कर ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के अगले ही दिन कुछ मार्गों पर हवाई किरायों में कमी देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि चेन्नई के लिए किराया लगभग 7,000 रुपये, कोलकाता के लिए लगभग 5,000 रुपये और दिल्ली के लिए लगभग 12,000 रुपये तक कुछ मामलों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि जब तक लोग अपनी आवाज नहीं उठाएंगे और विरोध नहीं करेंगे, तब तक इस तरह के परिणाम सामने नहीं आएंगे।

टी एस जी भास्कर ने कहा कि अभियान का अगला चरण अब शुरू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल जल्द ही सांसद से मुलाकात करेगा। इसके बाद उपराज्यपाल से मिलने का प्रयास किया जाएगा और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मुलाकात के लिए दिल्ली जाने वाला एक प्रतिनिधिमंडल भी तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली जाकर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के सामने द्वीपवासियों और पर्यटन क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं को विस्तार से रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा प्रयास है, जो द्वीपवासियों और पर्यटन उद्योग के हित में किया जा रहा है। उन्होंने पर्यटन उद्योग को अंडमान का सबसे बड़ा उद्योग बताते हुए कहा कि यदि चार-पांच एयरलाइन संचालकों की मौजूदा व्यवस्था के कारण पर्यटन प्रभावित होता रहा तो बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है और इसे केवल मौजूदा पर्यटन सीजन तक सीमित नहीं रखा जा सकता।

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