बीमा कंपनियों की मनमानी पर सरकार लगाए लगामः रंजीत रंजन

कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने राज्यसभा में आम जनता की परेशानियों से जुड़ा मुद्दा शून्य काल में उठाया।
बीमा कंपनियों की मनमानी पर सरकार लगाए लगामः रंजीत रंजन
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नई दिल्लीः कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने सदन में आम जनता की परेशानियों से जुड़ा मुद्दा शून्य काल में उठाया। उन्होंने कहा लोगों से मोटी रकम वसूलने वाली बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं । जब ग्राहकों को उनके इलाज का पैसा देने का समय आता है तो कई तरह के बहाने लगाते हैं। 10 -12 सवाल पूछ लेते हैं। यहां तक कि ये भी पूछते हैं कि रात को क्यों अस्पताल में दाखिल हुए दिन में क्यों नहीं।

रंजीत रंजन ने कहा सरकार को बीमा धारकों की शिकायत दर्ज करने के लिए एक केंद्रीय पोर्टल बनाना चाहिए जहां कि सब अपनी शिकायत दर्ज करवा सकें। बीमा कंपनियों के लिए जो कानून बनाए गए हैं, वे केवल कागजों पर न हों, जमीनी स्तर पर लागू होने चाहिए।

त्रिपुरा के नए नेशनल हाईवे में क्यों है गड्ढेः भट्टाचार्य

त्रिपुरा के भाजपा सांसद राजीव भट्टाचार्य ने शून्यकाल में अपने राज्य केनेशनल हाईवे 2, 3 और 8 की बदहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन सड़कों पर इतने बड़े-बड़े गढ्ढे हैं कि सबको परेशानी हो रही है। उन्होंने मांग की कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी इस ओर ध्यान दे और जल्दी से जल्दी इनकी मरम्मत करवाए।

शिप्रा नदी की धारा बनी रहे अविरल और पवित्रः योगी उमेश नाथ

मध्यप्रदेश से भाजपा सांसद बाल योगी उमेश नाथ ने सदन में शिप्रा नदी के प्रवाह का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2028 में उज्जैन में महाकुंभ होने वाला है। साधु-संत और करोड़ों भक्तजन स्नान करने आयेंगे। ऐसे में नदी की पवित्रा बनाए रखने के प्रयास अभी से शुरू होने चाहिए। बालयोगी ने इस पर विरोध जताया कि इंदौर की कान नदी का जहरीला पानी शिप्रा के साथ क्यों मिलाया जा रहा है। इसके बजाए पवित्र नर्मदा नदी का पानी शिप्रा के साथ मिलाया जाना चाहिए। सिंहस्थ एक बड़ा दुर्लभ संयोग है जो कि 12 साल के बाद आता है। यदि हमने कुंभ स्नान के लिए ठीक से प्रयास नहीं किए तो आने वाली पीढ़ी हमको माफ नहीं करेगी।

स्क्रीन टाइम कम करके बचाओ बचपनः संजय झा

जेडीयू सांसद संजय झा ने एक संवेदनशील मुद्दा सदन में उठाया। बच्चों के हाथ में दिए गए स्मार्ट फोन उनका बचपन छीन रहे हैं और उनको मानसिक रोग दे रहे हैं। संजय झा ने कहा कि यदि बच्चों का बचपन बचाना है तो उनका स्क्रीन टाइम कम करना होगा। सांसद ने एक सर्वे का हवाला दिया जो कि देश के पांच राज्यों में किया गया था और साढ़े तीन हजार से ज्यादा माता पिता के बात की गयी थी। सर्वे के अनुसार 85 फीसदी घरों में स्मार्टफोन प्रयोग किए जा रहे हैं ।बच्चों की मानसिक सेहत पर इसका बुरा असर हो रहा है। हाल ही में आए 2025 के आर्थिक सर्वेक्षण में भी स्मार्ट फोन के बच्चों पर दुष्प्रभावों के बारे में बताया गया है। अनेक देशों ने बच्चों को सोशल मीडिया और इंटरनेट से दूर रखने का कानून बना दिया है। भारत को भी इस बारे में सोचना चाहिए।

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