

गुवाहाटी : कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने मणिपुर में जारी संकट को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा के करीब तीन साल बाद भी पुनर्वास, जांच और शांति बहाली की प्रक्रिया में देरी पर चिंता जताई।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए गोगोई ने कहा कि राज्य में असुरक्षा, विस्थापन और बार-बार हो रही हिंसा के कारण आम लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। गोगोई ने कुकी-जो, नागा और मैतेई समुदायों के बीच बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि फरवरी से कुकी-नागा हिंसा में हुई मौतें और अन्य घटनाएं गंभीर स्थिति की ओर इशारा करती हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि मई 2023 में भड़की हिंसा में 300 से अधिक लोगों की जान गई थी और हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट की समिति और शांति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे में देरी और फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को लेकर भाजपा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मणिपुर यात्रा के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकलने पर भी चिंता जताई।
गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति की अध्यक्षता कर चुकीं जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की रिपोर्ट में उठाए गए मानवीय मुद्दों का हवाला दिया। उन्होंने राहत शिविरों में अप्राकृतिक मौतों, एफआईआर, जांच और विस्थापितों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की जानकारी मांगी।
उन्होंने जून 2023 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित शांति समिति की स्थिति और हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में देरी पर भी सवाल उठाए। साथ ही, इंडिया ब्लॉक की मांग के बावजूद सर्वदलीय बैठक की तारीख तय नहीं होने पर चिंता जताई। गोगोई ने कहा कि मणिपुर के लोग जवाबदेही के हकदार हैं। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा, निष्पक्ष जांच, प्रभावी पुनर्वास और निरंतर बातचीत के जरिए शांति बहाल करने की मांग की।