पक्षियों की दुनिया से मैंग्रोव की रहस्यमयी पगडंडियों तक, प्रकृति संग जुड़ने उमड़े लोग

पक्षियों की दुनिया से मैंग्रोव की रहस्यमयी पगडंडियों तक, प्रकृति संग जुड़ने उमड़े लोग
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : सूचना, प्रचार एवं पर्यटन निदेशालय , अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने पर्यावरण एवं वन विभाग तथा दक्षिण फाउंडेशन , नॉर्थ वंडूर के सहयोग से पर्यटन मेले, उत्सव एवं कार्यक्रम कैलेंडर 2026-27 के अंतर्गत 14 जून को कालातांग में ‘आइलैंड बर्ड वॉक’ तथा शोल बे-19 में ‘आइलैंड मैंग्रोव वॉक’ का सफल आयोजन किया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना, द्वीपसमूह की समृद्ध जैव विविधता के प्रति जागरूकता फैलाना तथा प्रकृति आधारित गतिविधियों में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना था। आइलैंड बर्ड वॉक में कुल 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि आइलैंड मैंग्रोव वॉक में लगभग 50 लोगों की सहभागिता रही। कार्यक्रमों के दौरान प्रतिभागियों को पक्षी संरक्षण, मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता संरक्षण तथा सतत पर्यटन पद्धतियों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि द्वीपसमूह की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए सामुदायिक भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इन कार्यक्रमों को स्थानीय समुदाय से अत्यंत उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। ग्राम पंचायत मन्नारघाट और शोल बे के प्रधानों ने बड़ी संख्या में प्रतिभागियों को कार्यक्रमों से जोड़ने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। उनके प्रयासों के कारण स्थानीय लोगों की भागीदारी उल्लेखनीय रही और कार्यक्रमों को व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। पर्यावरण एवं वन विभाग, दक्षिण फाउंडेशन, स्थानीय पंचायतों तथा उत्साही प्रतिभागियों के सक्रिय सहयोग ने दोनों कार्यक्रमों के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सभी संबंधित पक्षों के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुए और लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफलता मिली। आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देती हैं, बल्कि लोगों को प्रकृति के करीब लाने और सतत पर्यटन को प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यक्रमों के माध्यम से आम जनता के बीच संरक्षण और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया।

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