मुरादाबाद से विश्व तक: ओडीओपी ने बदली पीतल शिल्प की तस्वीर

उत्तर प्रदेश के हृदय में बसा मुरादाबाद शहर पीढ़ियों से अपने कुशल कारीगरों और विश्व-प्रसिद्ध पीतल शिल्प के लिए जाना जाता रहा है।
मुरादाबाद से विश्व तक: ओडीओपी ने बदली पीतल शिल्प की तस्वीर
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नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के हृदय में बसा मुरादाबाद शहर पीढ़ियों से अपने कुशल कारीगरों और विश्व-प्रसिद्ध पीतल शिल्प के लिए जाना जाता रहा है। यहाँ की तंग गलियों में स्थित पारिवारिक वर्कशॉप्स में कारीगर पिघली हुई धातु को कला में ढालते आए हैं, लेकिन उनकी पहचान लंबे समय तक स्थानीय सीमाओं तक ही सिमटी रही।

साल 2018 में इस कहानी ने नया मोड़ लिया, जब राज्य सरकार की एक दूरदर्शी पहल के तहत मुरादाबाद के पीतल शिल्प को जिले के प्रतीकात्मक उत्पाद के रूप में चुना गया—वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) के अंतर्गत। यह पहल जितनी सरल थी, उतनी ही परिवर्तनकारी भी। उद्देश्य था—हर जिले के एक विशिष्ट उत्पाद की पहचान कर उसे ब्रांडिंग, बाज़ार तक पहुँच, संस्थागत सहयोग और वैश्विक मंच प्रदान करना, ताकि उसके पीछे जुड़े समुदाय सशक्त हो सकें।

परिणाम स्पष्ट थे। मुरादाबाद का पीतल शिल्प अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों तक पहुँचा, कारीगरों की आय में वृद्धि हुई, स्थानीय गर्व को नई पहचान मिली और कभी आर्थिक गुमनामी में रहा यह जिला आत्मनिर्भर समृद्धि का उदाहरण बन गया।

मुरादाबाद केवल एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय परिवर्तन का पहला अध्याय साबित हुआ। दिसंबर 2025 तक ओडीओपी को देशभर में अपनाया गया और यह 770 से अधिक जिलों तक विस्तारित हो चुका है, जिससे लाखों कारीगरों, किसानों और उद्यमियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। उत्तर प्रदेश से शुरू हुई यह पहल आज स्थानीय आर्थिक विकास की भारत की सबसे चर्चित और प्रभावी योजनाओं में से एक बन चुकी है।

ओडीओपी ने आय में वृद्धि, रोज़गार सृजन, ज़िला-स्तरीय मूल्य श्रृंखलाओं के विकास और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच को सशक्त बनाकर ठोस आर्थिक प्रभाव डाला है। ब्रांडिंग, प्रदर्शनियों और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस पहल ने न केवल भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है, बल्कि टिकाऊ विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी मजबूती दी है।

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