रेल से कश्मीर घाटी तक पहली बार पूरी खाद्यान्न रेक, खराब मौसम में भी सप्लाई हुई आसान

कश्मीर घाटी को अब हर मौसम में भरोसेमंद रेल कनेक्टिविटी का बड़ा लाभ मिलने लगा है।
रेल से कश्मीर घाटी तक पहली बार पूरी खाद्यान्न रेक, खराब मौसम में भी सप्लाई हुई आसान
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अंजली भाटिया

नई दिल्ली : कश्मीर घाटी को अब हर मौसम में भरोसेमंद रेल कनेक्टिविटी का बड़ा लाभ मिलने लगा है। भारतीय रेल ने खाद्यान्न आपूर्ति के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार 42 वैगनों की पूरी रेक के ज़रिये 2,768 मीट्रिक टन चावल अनंतनाग पहुंचाया है। यह रेक 22 जनवरी को घाटी में पहुंची, जिससे खाद्यान्न वितरण नेटवर्क को बड़ी मजबूती मिली है।

रेल मंत्रालय के मुताबिक, इससे पहले कश्मीर घाटी के लिए केवल मिनी रेक चलाई जाती थीं, जिनमें 21 वैगन होते थे और करीब 1,384 मीट्रिक टन खाद्यान्न की ढुलाई होती थी। इस बार पूरी रेक को 21 जनवरी को पंजाब के संगरूर रेल टर्मिनल से लोड किया गया और महज 24 घंटे के भीतर अनंतनाग गुड्स शेड तक पहुंचाया गया। एक दिन पहले खराब मौसम के कारण अनलोडिंग कार्य प्रभावित हुआ था, इसके बावजूद रेक को सफलतापूर्वक संभाला गया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह पहल खाद्य निगम (FCI) के साथ समन्वय में की गई है, ताकि लॉजिस्टिक्स और मालभाड़ा लागत को कम किया जा सके। सड़क मार्ग की तुलना में रेल से खाद्यान्न पहुंचाने से समय की बचत के साथ-साथ परिवहन खर्च भी घटेगा। इससे घाटी में विशेषकर सर्दियों और बर्फबारी के दौरान पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखने में मदद मिलेगी।

रेल के जरिए खाद्यान्न की ढुलाई बढ़ने से राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी ट्रकों की निर्भरता भी कम होगी, जिससे पर्यावरण को लाभ और परिवहन व्यवस्था को अधिक दक्ष बनाया जा सकेगा। इससे पहले सेब, सीमेंट और उर्वरकों की सफल रेल ढुलाई हो चुकी है। यह उपलब्धि उधमपुर–श्रीनगर–बारामुला रेल लिंक (USBRL) परियोजना की सफलता को भी दर्शाती है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से कश्मीर घाटी में व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिल रही है, जिसका सीधा लाभ किसानों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को मिल रहा

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