मणिपुर में दो गुटों के बीच गोलीबारी, तीन की मौत

सुरक्षाकर्मियों ने व्यापक घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया
Firing between two groups in Manipur; three dead
स्थानीय लोगों से जानकारी लेते पुलिस व सुरक्षा कर्मी
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इंफाल : मणिपुर के नोनी जिले में प्रतिद्वंद्वी नगा सशस्त्र संगठनों के संदिग्ध सदस्यों के बीच गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। घटना के बाद गुरुवार तड़के 500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने व्यापक घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। संयुक्त अभियान सुबह करीब 3.30 बजे ताओदाइजांग और केकरू नागा गांवों में शुरू हुआ। इसमें मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), कोबरा और असम राइफल्स के जवान शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने इलाके में निवासियों की पहचान की पुष्टि की और दिनभर तलाशी अभियान जारी रखा। पुलिस के अनुसार, बुधवार देर रात करीब 1.55 बजे नुंगबा थाने से लगभग 19 किलोमीटर पूर्व ताओदाइजांग गांव में गोलीबारी शुरू हुई। इसमें नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (इसाक-मुइवा) यानी एनएससीएन (आईएम) और जेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट (जेडयूएफ-जे) के जेनचुई गुट की संलिप्तता का संदेह है। हालांकि, एनएससीएन (आईएम) ने इस घटना पर कोई बयान जारी नहीं किया है। स्थानीय निवासियों ने घटनास्थल से तीन शव बरामद किए। जेडयूएफ-जेनचुई गुट ने मृतकों में से दो की पहचान अपने सदस्यों एम. थाइमेई और जी. कामसन के रूप में की है। संगठन का आरोप है कि उसके कैडर का सामना एनएससीएन (आईएम), जेडयूएफ के कामसन गुट और एनएससीएन-के (निकी सुमी) के संयुक्त दस्ते से हुआ था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। तीसरे मृतक की पहचान पुंगमोन चिंगचेन गांव के निवासी एहुंग खुंबा के रूप में हुई है। उनका किसी सशस्त्र संगठन से जुड़ाव स्पष्ट नहीं है। इस बीच, कांगपोकपी जिले में सुरक्षा बलों पर तलाशी अभियान के दौरान नकदी और सामान ले जाने के आरोप लगे हैं। सैकुल उपमंडल की चिंगदाई एरिया कोर कमेटी (सीएसीसीओ) ने मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा के जवानों को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। समिति के अनुसार, 20 अक्टूबर को एस फेलेंगकोट गांव में तलाशी के दौरान कथित तौर पर 40 हजार रुपये नकद, पशुधन, सौर उपकरण, औजार और मोबाइल सामान ले जाए गए। समिति ने सामान 4 नवंबर तक लौटाने की मांग की थी और ऐसा नहीं होने पर संबंधित जवानों तथा उनके अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दी थी। इन आरोपों से राज्य में सुरक्षा अभियानों को लेकर तनाव और बढ़ गया है। मणिपुर वर्ष 2023 से जातीय हिंसा से प्रभावित है।

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