अंडमान में उर्वरक संकट गहराया, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

पंचायतों के वित्तपोषण और विकास संबंधी मुद्दों पर चिंता जताई
अंडमान में उर्वरक संकट गहराया, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : केरलापुरम निर्वाचन क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य सुनीति हलदार ने मायाबंदर जिला परिषद कार्यालय में अन्य पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में भाग लेने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उत्तर एवं मध्य अंडमान को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। सुनीति हलदार ने कहा कि उत्तर एवं मध्य अंडमान के विभिन्न क्षेत्रों से पंचायत और पंचायती राज संस्थाओं सदस्य मायाबंदर में एकत्रित हुए थे ताकि अपने-अपने क्षेत्रों में अधूरे या रुके हुए विकास कार्यों पर चर्चा की जा सके। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर समस्याओं में से एक डिगलीपुर में उर्वरकों की भारी कमी है, जबकि यह क्षेत्र द्वीपों में सब्जियों और धान के उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने बताया कि मानसून और धान की खेती के महत्वपूर्ण समय में डिगलीपुर में किसानों को एक भी बोरी उर्वरक उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह उपायुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन दे चुकी हैं और किसानों के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर चुकी हैं। सुनीति हलदार ने पंचायती राज संस्थाओं को पर्याप्त वित्तीय सहायता न मिलने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीआरआई कार्यकाल के लगभग चार वर्ष पूरे होने के बावजूद प्रधानों, समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों सहित कई जनप्रतिनिधि सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण विकास कार्य नहीं करा पाए हैं। उन्होंने प्रशासन से पंचायती राज संस्थाओं संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने तथा उन्हें पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने द्वीपों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि अस्पतालों में अब भी दवाओं, उपकरणों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी बनी हुई है। उन्होंने विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में रोग प्रकोप के दौरान जांच सुविधाओं तक पहुंच में आने वाली कठिनाइयों का भी उल्लेख किया।जिला परिषद सदस्य ने उत्तर एवं मध्य अंडमान की सड़कों, विशेषकर हालिया वर्षा से प्रभावित राष्ट्रीय राजमार्ग-4 की स्थिति की भी आलोचना की। उनके अनुसार सड़क के कई हिस्से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे यात्रियों और स्थानीय निवासियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और पुल परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हो रही देरी पर भी चिंता व्यक्त की। बिजली आपूर्ति के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के दावों के बावजूद डिगलीपुर, मायाबंदर और रंगत में लगातार बिजली कटौती हो रही है, जिससे लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने क्षेत्र में विद्युत सेवाओं में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि मौजूदा प्रणाली की कमियों के कारण विद्यार्थियों को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और कृषि सहायता प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होनी चाहिए। सुनीति हलदार ने राजनीतिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे प्रशासन के साथ संवाद करते समय जनकल्याण और विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दें। उन्होंने आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान और जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। पंचायती राज संस्थाओं के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए उन्होंने कहा कि यदि गांव स्तर पर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को प्रभावी बनाना है तो स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को पर्याप्त अधिकार और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से जिला परिषदों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराने की अपील की ताकि वे विकास कार्यों को आगे बढ़ा सकें और जनता की अपेक्षाओं को पूरा कर सकें।


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