

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान आइडिया समिट में अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह के लिए व्यापक विकास दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया, जिसमें कनेक्टिविटी, समुद्री अवसंरचना, पर्यटन, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करने पर ज़ोर दिया गया ताकि द्वीपों को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख विकास केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके। अंडमान आइडिया समिट शिखर सम्मेलन 20 जून को शाम होटल लेमन ट्री में जित किया गया था। केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और उप राज्यपाल, अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह एवं उपाध्यक्ष, द्वीप विकास एजेंसी एडमिरल डी.के. जोशी, (अ.प्रा.) ने शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
शिखर सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना को सभी हितधारकों का आवश्यक समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना निकोबार द्वीपसमूह के पारिस्थितिक तंत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित नहीं करेगी। उन्होंने उल्लेख किया कि यदि यह परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो जाती है, तो यह भारत की सबसे महत्वाकांक्षी और परिवर्तनकारी विकास पहलों में से एक बन जाएगी। उन्होंने इसे न केवल इसके पैमाने और निवेश के संदर्भ में, बल्कि इसके अत्यधिक रणनीतिक महत्व के कारण भी एक ऐतिहासिक परियोजना बताया। मंत्री ने कहा कि यह परियोजना भारत सरकार द्वारा परिकल्पित प्रमुख पहलों में से एक है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की परिकल्पना पर्यावरण स्थिरता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए की गई है। हितधारकों, व्यापार जगत के सदस्यों, बुद्धिजीवियों और अन्य प्रतिभागियों की सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने परियोजना को समग्र रूप से समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना की योजना इस क्षेत्र के पर्यावरण, वन्यजीवों और नाजु़क पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए ठोस उपायों के साथ बनाई गई है। भारत के पर्यावरण कानूनों और नियामक ढांचे की मजबूती पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजना पारिस्थितिक हितों की रक्षा के साथ-साथ इस क्षेत्र की विशाल क्षमता को भी उजागर करेगी। केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि ग्रेट निकोबार परियोजना का प्रभाव न केवल द्वीपों पर बल्कि पड़ोसी देशों पर भी व्यापक रूप से पड़ेगा, और इसके व्यापक रणनीतिक और आर्थिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने परियोजना के महत्व और दीर्घकालिक लाभों के बारे में नागरिकों में अधिक जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया।