

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम - अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में कार्यरत संगठन लिविंग ऑन द एज ने पिछले दो से तीन दशकों के दौरान हुए महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय, भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक बदलावों को देखते हुए द्वीपसमूह में सरकारी कार्यालयों, प्रतिष्ठानों तथा कर्मचारियों की तैनाती का व्यापक आकलन और पुनर्गठन करने का आग्रह अंडमान एवं निकोबार प्रशासन से किया है।
पत्र में लिविंग ऑन द एज के अध्यक्ष अभय कुमार ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर वर्तमान सरकारी प्रशासनिक ढांचे का नए सिरे से तथ्यों पर आधारित मूल्यांकन करने की मांग की है। इसमें विभिन्न विभागों के कार्यालयों के स्थान, स्वीकृत कर्मचारी संख्या और सरकारी कर्मचारियों की तैनाती की स्थिति का आकलन शामिल है।
पत्र के माध्यम से यह रेखांकित किया गया है कि वर्तमान संगठनात्मक ढांचा काफी हद तक लगभग 25 से 30 वर्ष पहले किए गए आकलनों और उस समय तैयार की गई व्यवस्थाओं पर आधारित है। तब से लेकर अब तक द्वीपों में जनसंख्या का वितरण, बस्तियों का स्वरूप, परिवहन संपर्क, प्रशासनिक आवश्यकताएं और सार्वजनिक सेवाओं की मांग में काफी बदलाव आ चुका है।
इस स्थिति को देखते हुए संगठन ने प्रशासन से प्रत्येक आबाद द्वीप, तहसील और प्रमुख बस्ती की वर्तमान जनसंख्या तथा जनसांख्यिकीय वितरण का आकलन करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों और क्षेत्रीय प्रतिष्ठानों के वर्तमान स्थान तथा उनके अधिकार क्षेत्र की भी समीक्षा करने की मांग की गई है। प्रत्येक विभाग में स्वीकृत पदों की संख्या, वास्तविक तैनाती और रिक्त पदों की स्थिति का भी आकलन करने को कहा गया है।
संगठन ने प्रत्येक प्रतिष्ठान में वर्तमान जनसंख्या और भौगोलिक आवश्यकताओं के आधार पर कार्यभार तथा सार्वजनिक सेवाओं की मांग का मूल्यांकन करने की भी अपील की है। साथ ही दूरदराज और भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में कर्मचारियों की पर्याप्त उपलब्धता का भी आकलन करने को कहा गया है।
प्रस्ताव में मौजूदा कार्यालयों के युक्तिसंगत पुनर्गठन तथा आवश्यकता के अनुसार नए प्रतिष्ठानों के निर्माण, कार्यालयों के स्थानांतरण अथवा उनके उन्नयन की बात कही गई है। संगठन ने वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर संवर्ग पुनर्गठन और स्वीकृत पदों की संख्या में संशोधन की भी मांग की है, ताकि पुरानी कर्मचारी व्यवस्था के बजाय वर्तमान जरूरतों को आधार बनाया जा सके।
लिविंग ऑन द एज ने आवश्यक सरकारी सेवाओं के बेहतर विकेंद्रीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए तर्क दिया कि इससे दूरदराज और बाहरी द्वीपों के निवासियों को सरकारी सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, संगठन ने जनसंख्या, कार्यभार, भौगोलिक विस्तार, पहुंच और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विभाग के लिए उचित कर्मचारी व्यवस्था निर्धारित करने की भी मांग की है।
संगठन के अनुसार, व्यापक पुनर्मूल्यांकन से उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जहां कर्मचारियों और प्रशासनिक ढांचे की कमी है। इसके साथ ही ऐसे प्रतिष्ठानों की भी पहचान हो सकेगी जहां वर्तमान कर्मचारी तैनाती वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं रह गई है। एक ठोस समाधान के रूप में, लिविंग ऑन द एज ने सुझाव दिया कि पूरे अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में सरकारी प्रतिष्ठानों का नए सिरे से तथ्यों पर आधारित मूल्यांकन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति अथवा उपयुक्त प्रशासनिक व्यवस्था गठित की जा सकती है।
संगठन का मानना है कि ऐसी समीक्षा से प्रशासनिक पुनर्गठन, कर्मचारियों के पुनर्वितरण, नए कार्यालयों के निर्माण अथवा मौजूदा कार्यालयों के उन्नयन और स्वीकृत पदों की संख्या में संशोधन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इससे यह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी कि द्वीपसमूह का प्रशासनिक ढांचा वर्तमान जनसांख्यिकीय और भौगोलिक वास्तविकताओं के अनुरूप बना रहे।