गृह सचिव समेत 9 IAS को पर्यवेक्षक सूची से हटाने की मांग

नवान्न ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, सुझाए विकल्प
गृह सचिव समेत 9 IAS को पर्यवेक्षक सूची से हटाने की मांग
Published on

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव के संकेत मिले हैं। नवान्न सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा सहित 9 वरिष्ठ IAS अधिकारियों को केंद्रीय पर्यवेक्षक (सेंट्रल ऑब्जर्वर) की सूची से हटाने का अनुरोध करते हुए आयोग को पत्र भेजा है। यही नहीं, राज्य ने इस संबंध में 9 वैकल्पिक नाम भी दिए। इस पत्र की प्रति राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल को भी भेजी गई है।

दरअसल, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनावी तैयारियों के तहत पश्चिम बंगाल कैडर के 25 वरिष्ठ अधिकारियों को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है, जिनमें 15 IAS और 10 IPS अधिकारी शामिल हैं। नवान्न का तर्क है कि चुनाव आयोग ने इस फैसले पर राज्य से सहमति नहीं ली। जिस राज्य में स्वयं चुनाव होने हैं, वहां के गृह सचिव जैसे अहम पदाधिकारी को बाहर भेजने से कानून-व्यवस्था और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ेगा। जिन 9 IAS अधिकारियों को हटाने की मांग की गई है, वे सभी महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख हैं।

नवान्न सूत्रों के अनुसार, इनमें गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा सहित संजय बंसल, पी. मोहन गांधी, अवनींद्र सिंह, पी. बी. सलीम, सौमित्र मोहन, शुभाज्ञान दास, रचना भगत और पी. उलगानाथन शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, विकल्प के तौर पर नवान्न ने आयोग को जिन 9 अधिकारियों के नाम भेजे हैं, वे हैं— राजीव कुमार, अभिनव चंद्र, निरंजन कुमार, डॉ. विश्वनाथ, अपला सेठ, तापस कुमार बागची, ससीम कुमार बड़ाई, सोनम भूटिया और आर. अर्जुन। IPS अधिकारियों के मामले में राज्य सरकार ने औपचारिक रूप से कोई सूची नहीं भेजी है, लेकिन दो IPS अधिकारियों—भरत लाल मीणा और ऋषिकेश मीणा—ने स्वास्थ्य कारणों से व्यक्तिगत रूप से छूट की मांग की है।

इस बीच, मतदाता सूची संशोधन कार्य से जुड़े तीन IAS अधिकारियों — स्मिता पांडे, अश्विनी यादव और रणबीर कुमार के तबादले को लेकर उठे सवालों पर भी राज्य सरकार ने आयोग को जवाब दिया है। हालांकि, चुनाव आयोग अपने फैसले पर अडिग दिख रहा है। आयोग का कहना है कि उसने कई बार राज्य सरकार से नाम मांगे थे, लेकिन समय पर जवाब नहीं मिलने के कारण उसे स्वयं सूची तय करनी पड़ी। अब देखना होगा कि नवान्न के वैकल्पिक प्रस्ताव को आयोग कितनी अहमियत देता है।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in