

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार प्रदेश कांग्रेस समिति की अभियान समिति के अध्यक्ष टीएसजी भास्कर ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री को पत्र लिखकर श्री विजयपुरम और देश के प्रमुख मुख्यभूमि शहरों के बीच संचालित उड़ानों के अत्यधिक हवाई किराए पर तत्काल नियंत्रण लगाने की मांग की है। अपने पत्र में भास्कर ने कहा कि श्री विजयपुरम को दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, विशाखापत्तनम तथा अन्य मुख्यभूमि शहरों से जोड़ने वाले हवाई मार्गों पर टिकटों की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुकी हैं। उन्होंने अपने हालिया यात्रा अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि दिल्ली से पोर्ट ब्लेयर तक दो यात्रियों के लिए एक तरफ का हवाई किराया 73,662 रुपये देना पड़ा, जो टिकट दरों में चिंताजनक वृद्धि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह की घरेलू यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को कई विदेशी देशों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा से भी अधिक किराया देना पड़ रहा है। उनके अनुसार इस प्रकार की मूल्य निर्धारण व्यवस्था द्वीपवासियों पर असहनीय आर्थिक बोझ डाल रही है, क्योंकि उनके पास हवाई यात्रा के अतिरिक्त कोई व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं है। साथ ही इसका प्रतिकूल प्रभाव पर्यटन पर भी पड़ा है, जिसके कारण द्वीपों में आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी देखी जा रही है। भास्कर ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के लोगों की उच्च शिक्षा, विशेष चिकित्सा उपचार, रोजगार, व्यापारिक गतिविधियों तथा पारिवारिक आपात स्थितियों के लिए पूरी तरह हवाई संपर्क पर निर्भरता है। मुख्यभूमि के शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे विद्यार्थी तथा चेन्नई, कोलकाता और दिल्ली जैसे शहरों में उन्नत चिकित्सा सुविधा लेने जाने वाले मरीज सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अनेक परिवार गंभीर रूप से बीमार मरीजों को स्ट्रेचर सहित विमान से मुख्यभूमि ले जाने के लिए भारी-भरकम राशि खर्च करने को विवश हैं। कई परिवारों को यात्रा व्यय जुटाने के लिए अपनी संपत्ति तक बेचनी पड़ रही है। उन्होंने इस स्थिति को आर्थिक रूप से विनाशकारी तथा केंद्र शासित प्रदेश के नागरिकों के साथ अन्यायपूर्ण बताया, जहां हवाई परिवहन ही मुख्य जीवनरेखा है। भास्कर ने हवाई किराए के नियमन के अभाव पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि जहां सरकार पैकेज्ड पेयजल जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य निर्धारित करती है, वहीं द्वीपों के लिए अत्यावश्यक हवाई सेवाओं के किराए पर कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है। उन्होंने यह चिंता भी व्यक्त की कि ऑफ-सीजन के दौरान विमान कंपनियां उड़ानों की संख्या कम कर देती हैं, जिससे सीटों की उपलब्धता घट जाती है और टिकटों के दाम और अधिक बढ़ जाते हैं। अपने पत्र में उन्होंने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से तत्काल प्रभाव से कई कदम उठाने का आग्रह किया है। इनमें अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के लिए संचालित सभी विमान सेवाओं को वर्षभर उचित और किफायती किराया बनाए रखने का निर्देश देना, पोर्ट ब्लेयर और मुख्यभूमि के सभी शहरों के बीच हवाई किराए की अधिकतम सीमा निर्धारित करना ताकि मनमानी मूल्य वृद्धि पर रोक लग सके, उड़ानों की संख्या बढ़ाना तथा विभिन्न विमान कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना ताकि टिकटों की कीमतें कम हो सकें, मुख्यभूमि में चिकित्सा उपचार के लिए जाने वाले मरीजों को रियायती किराया उपलब्ध कराना तथा यात्रा के व्यस्त मौसम में अतिरिक्त चार्टर्ड उड़ानों का संचालन करना शामिल है। भास्कर ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के लोगों के लिए हवाई यात्रा कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक अत्यावश्यक सेवा और मुख्यभूमि से संपर्क का एकमात्र विश्वसनीय माध्यम है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय शीघ्र आवश्यक कदम उठाकर हवाई किराए को विनियमित करेगा तथा लाखों द्वीपवासियों और पर्यटकों को अत्यधिक किराए के बोझ से राहत दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई करेगा।