फेरारगंज तहसील में लंबित सर्वे एवं सेटलमेंट कार्यों की जांच की मांग

सांसद ने आम नागरिक सेवाएं प्रभावित न करने पर दिया जोर
फेरारगंज तहसील में लंबित सर्वे एवं सेटलमेंट कार्यों की जांच की मांग
Published on

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के सांसद बिष्णु पद रे ने फेरारगंज तहसील, दक्षिण अंडमान में लंबे समय से चल रहे और कथित रूप से अनियमित सर्वे एवं सेटलमेंट कार्यों को लेकर 21 अप्रैल 2026 को मुख्य सचिव, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी। पत्र की प्रतियां केंद्रीय गृह मंत्री तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल को भी भेजी गई थीं। अपने पत्र में सांसद ने उल्लेख किया कि अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भूमि राजस्व एवं भूमि सुधार विनियमन, 1966 की धारा 48(1) के तहत अधिसूचना 20 जुलाई 2011 को जारी की गई थी। हालांकि कई वर्ष बीत जाने के बावजूद फेरारगंज तहसील में अभिलेखों के अंतिम रूप को लेकर अब तक कोई स्पष्ट, सुलभ एवं गांववार सार्वजनिक स्थिति उपलब्ध नहीं है। सांसद ने कहा कि सभी गांवों में पुराने अंतिम अभिलेख पहले से मौजूद थे, लेकिन नागरिकों द्वारा गंभीर शिकायतें की जा रही हैं कि नए तैयार किए गए नक्शों और अभिलेखों को पुराने अंतिम अभिलेखों, नक्शों एवं वास्तविक भूमि स्थिति से सही तरीके से नहीं जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि विवाद कम होने के बजाय वर्तमान प्रक्रिया से भ्रम, कठिनाई और अविश्वास बढ़ा है। बिष्णु पद रे ने जोर देकर कहा कि लंबित सेटलमेंट कार्यों के कारण सामान्य राजस्व प्रशासन को ठप नहीं होने दिया जा सकता। उनके अनुसार सीमांकन, भूमि परिवर्तन और अन्य क्षेत्रीय राजस्व सेवाओं को केवल इस आधार पर अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता कि सेटलमेंट कार्य लंबित हैं। जिन गांवों में नए अभिलेख विधिवत अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं, वहां पुराने अंतिम अभिलेखों के आधार पर ही दैनिक प्रशासन एवं नागरिक सेवाएं जारी रहनी चाहिए। सांसद ने प्रशासन से वर्ष 2011 से फेरारगंज तहसील में किए गए सर्वे एवं सेटलमेंट कार्यों की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि नए तैयार अभिलेखों को अंतिम रूप देने से पहले पुराने अंतिम अभिलेखों, नक्शों, फील्ड बुक तथा वैध भूमि स्वामित्व इतिहास के साथ अनिवार्य रूप से मिलान किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच एवं मिलान प्रक्रिया पूरी होने तक विवादित नए अभिलेखों को अंतिम रूप देने या उन्हें लागू करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। साथ ही प्रशासन से फेरारगंज तहसील की गांववार सार्वजनिक स्थिति रिपोर्ट जारी करने को कहा गया है, जिसमें अधिसूचना की तिथि, सर्वे की वर्तमान स्थिति, अभिलेख तैयार होने की स्थिति, अंतिम रूप तथा सामान्य नागरिक मामलों के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण की जानकारी स्पष्ट रूप से दी जाए। सांसद ने कहा कि जांच के दौरान यदि देरी, लापरवाही, अनियमितता, अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्रवाई अथवा भ्रष्टाचार पाया जाता है तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित नागरिकों, भूमि धारकों एवं जनप्रतिनिधियों को अपनी आपत्तियां, दस्तावेज और क्षेत्रीय शिकायतें रखने का अवसर दिया जाए, ताकि प्रक्रिया वास्तविक स्थिति को दर्शाए और लोगों का विश्वास कायम रहे। बिष्णु पद रे ने कहा कि यह मामला अब केवल विभागीय विषय नहीं रह गया है, क्योंकि इसका सीधा संबंध वैध भूमि अभिलेखों, आम नागरिक सेवाओं तक पहुंच, भूमि प्रशासन में पारदर्शिता तथा राजस्व प्रशासन पर जनता के विश्वास से है।

logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in