दिल्ली में हरियाली का सबसे बड़ा अभियान: 23 लाख पौधों से बदलेगी राजधानी की तस्वीर

उपराज्यपाल की सीधी मॉनिटरिंग में रिज, जैव विविधता पार्कों और यमुना फ्लडप्लेन पर फोकस, स्थानीय प्रजातियों से जलवायु संकट और भूजल संरक्षण पर जोर
विदेशी या सजावटी पौधों की बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल देशी प्रजातियों को प्राथमिकता देने का फैसला
जुलाई के पहले सप्ताह से मध्य सितंबर तक राजधानी में करीब 23 लाख देशी पौधे लगाए जाएंगे
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नई दिल्लीः प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्र की चुनौती से जूझ रही राजधानी दिल्ली में अब बड़े स्तर पर पर्यावरण सुधार की तैयारी शुरू हो गई है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) आगामी मानसून सीजन में राजधानी के इतिहास के सबसे बड़े वृक्षारोपण अभियानों में से एक शुरू करने जा रहा है। इस अभियान के तहत जुलाई के पहले सप्ताह से मध्य सितंबर तक करीब 23 लाख देशी पौधे लगाए जाएंगे, जिससे लगभग 1000 एकड़ क्षेत्र में हरियाली का विस्तार होगा।

उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के निर्देश पर शुरू हो रहे इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि दिल्ली के पर्यावरणीय ढांचे को मजबूत करना और भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने की तैयारी करना है।

एलजी करेंगे अभियान की सीधी मॉनिटरिंग

हाल ही में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उपराज्यपाल ने दिल्ली के ग्रीन कवर को बढ़ाने और पारिस्थितिक संतुलन मजबूत करने पर विशेष जोर दिया था। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वृक्षारोपण अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसके परिणाम जमीन पर दिखाई दें।

डीडीए अधिकारियों के अनुसार अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा स्वयं उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा की जाएगी।

राजधानी के इन इलाकों में लगाए जाएंगे पौधे

यह अभियान दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में एक साथ चलाया जाएगा। इसके लिए कई महत्वपूर्ण स्थलों को चिन्हित किया गया है।

इनमें 675 डीडीए पार्क, दक्षिण-मध्य रिज क्षेत्र, नानकपुरा रिज, केंद्रीय रिज, उत्तरी रिज, छह जैव विविधता पार्क, यमुना फ्लडप्लेन क्षेत्र, सड़कों के किनारे विकसित हरित पट्टियां, नालों के किनारे ग्रीन कॉरिडोर और संस्थागत और सामुदायिक क्षेत्र शमिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान दिल्ली के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के लगभग तीन प्रतिशत हिस्से को सीधे प्रभावित करेगा।

देशी प्रजातियों को मिलेगी प्राथमिकता

डीडीए ने इस बार विदेशी या सजावटी पौधों के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल देशी प्रजातियों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।

इन पौधों का चयन कई महत्वपूर्ण मानकों के आधार पर किया गया है, जिनमें अधिक कार्बन अवशोषण क्षमता, भूजल संरक्षण में योगदान, स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा, तापमान नियंत्रण और माइक्रो-क्लाइमेट सुधार, कम रखरखाव में बेहतर विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि देशी पौधे दिल्ली की जलवायु में अधिक टिकाऊ साबित होंगे और पर्यावरणीय लाभ भी अधिक देंगे। इसके साथ ही पौधों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

विदेशी या सजावटी पौधों की बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल देशी प्रजातियों को प्राथमिकता देने का फैसला
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