

नयी दिल्ली : कांग्रेस ने मंगलवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को ‘टूल’ करार देते हुए दावा किया कि कुमार ने चुनाव संबंधी अनियमितताएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृहमंत्री अमित शाह के इशारे पर की हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि CEC को हटाये जाने के साथ ही प्रधानमंत्री को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
संसद से लेकर सड़क तक विरोध
मुख्य विपक्षी दल ने अपनी शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में यह फैसला भी किया कि ‘वोट चोरी’ के खिलाफ देशभर में आंदोलन चलाया जायेगा और इसमें दूसरे विपक्षी दलों का भी सहयोग लिया जायेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पार्टी संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश सहित कई वरिष्ठ नेता और कांग्रेसशासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। खरगे ने कार्य समिति की बैठक में कहा कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और निर्वाचन आयुक्तों के बीच भी मतभेद सामने आये हैं। ऐसे में संबंधित CEC को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें तत्काल हटाया जाना चाहिए। राहुल गांधी ने बैठक में कहा कि देश में चुनावों में EVM और मतदाता सूची से जुड़ी ‘मैच फिक्सिंग’ हो रही है, जिसके खिलाफ पार्टी को संसद से लेकर सड़क तक विरोध के साथ-साथ प्रतिरोध के रास्ते से पीछे नहीं हटना चाहिए।
CEC के तत्काल इस्तीफे की मांग
कार्य समिति के प्रस्ताव में कहा गया कि पार्टी CEC के तत्काल इस्तीफे की मांग करती है, जिन्होंने पने ‘सभी नैतिक और संस्थागत अधिकार’ खो दिये हैं। कांग्रेस ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से कम कुछ भी पर्याप्त नहीं होगा। प्रस्ताव में कहा गया कि भाजपा और उसके द्वारा चुने गये अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि जनता के मताधिकार से ‘छेड़छाड़’ का जवाब दिये बिना नहीं छोड़ा जायेगा। पार्टी ने कहा कि वह संसद, अदालतों और सड़कों पर तब तक अपना विरोध और प्रतिरोध करेगी जब तक दोषियों को दंडित नहीं किया जाता। प्रत्येक नागरिक का वोट सुरक्षित नहीं हो जाता और निर्वाचन आयोग को एक स्वतंत्र सांविधानिक संस्था के रूप में पुनर्स्थापित नहीं किया जाता।
तीन प्रमुख मांगें
प्रस्ताव में कांग्रेस कार्यसमिति ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। CEC के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा गया कि उन्होंने अपने सभी नैतिक और संस्थागत अधिकार खो दिये हैं। कार्य समिति ने मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और SIR की सांविधानिक वैधता पर गंभीर चिंता जताते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। उसने यह भी कहा कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों से हटाये गये 13.30 लाख लाख नाम तत्काल बहाल किये जायें।