

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजयपुरम : पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान, वांडूर में विभाग के फ्रंटलाइन कर्मचारियों के लिए एक सप्ताह का ओपन वाटर स्कूबा डाइविंग कोर्स सह रीफ मॉनिटरिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कोर्स का समापन कल वांडूर स्थित मरीन नेशनल पार्क के इंटरप्रिटेशन सेंटर में आयोजित समापन समारोह के साथ हुआ। यह कोर्स भारत सरकार के नेशनल कोस्टल मिशन के बायोस्फीयर मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य समुद्री संरक्षण, अंडरवॉटर निगरानी और कोरल रीफ मॉनिटरिंग में फ्रंटलाइन वन कर्मचारियों की क्षमता का विकास करना था, जो द्वीपों के नाजुक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे पूर्व, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव संरक्षक संजय कुमार सिन्हा ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए स्वयं प्रतिभागियों के साथ स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षण में भाग लिया और पानी के भीतर ही कोर्स पूर्णता प्रमाणपत्र वितरित किए, जो द्वीपसमूह में अपनी तरह का पहला आयोजन है। यह द्वीपों में पहली बार आयोजित जलमग्न प्रमाणपत्र वितरण समारोह था, जो समुद्री संरक्षण नेतृत्व के व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पीसीसीएफ एवं मुख्य वन्यजीव संरक्षक (सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू) उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. एस. दिनेश कन्नन, सीसीएफ (वन्यजीव) और डॉ. ए. अनिल कुमार, सीसीएफ (प्रादेशिक) मौजूद थे। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने द्वीपों की समुद्री जैव विविधता के संरक्षण को मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक रीफ मॉनिटरिंग और फ्रंटलाइन कर्मचारियों के कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। वहीं विशिष्ट अतिथियों ने कहा कि नेशनल कोस्टल मिशन के तहत इस प्रकार की पहल एक कुशल और सक्षम कार्यबल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो अंडमान-निकोबार की समृद्ध समुद्री जैव विविधता की रक्षा कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विभाग की सतत समुद्री संसाधन प्रबंधन और संरक्षण आधारित क्षमता निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करते हैं।
एक सप्ताह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्कूबा डाइविंग, अंडरवॉटर नेविगेशन, कोरल रीफ की पहचान और मॉनिटरिंग तकनीकों पर गहन व्यावहारिक सत्र शामिल थे। प्रतिभागियों ने रीफ के स्वास्थ्य का आकलन करने, समुद्री जैव विविधता की पहचान करने और कोरल ब्लीचिंग तथा मानवीय दबाव जैसे खतरों को समझने का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों की समर्पण भावना की सराहना की गई और क्षेत्र के अद्वितीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के प्रति पुनः संकल्प व्यक्त किया गया। इस एक सप्ताह के प्रशिक्षण में विभाग के कुल 14 फ्रंटलाइन कर्मचारियों ने भाग लिया।