राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकरों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन : एआई सत्र

संयम के बिना नवाचार जोखिम भरा, नवाचार के बिना संयम ठहराव की ओर ले जाता है – हरिवंश नारायण
राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकरों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन : एआई सत्र
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नयी दिल्ली: एआई को विधायिकाओं में कामकाज के लिए अपनाना है, तो उसे उत्तरदायी, संदर्भगत और भरोसेमंद बनाना होगा। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण ने राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में संसद में एआई अपनाए जाने पर आयोजित कार्यशाला में बताया कि किस तरह से भारतीय संसद में कुशल कार्यप्रणाली के लिए विकसित किए जा रहे विभिन्न डिजिटल और एआई उपकरणों का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जब कोई मानव किसी नए संगठन में प्रवेश करता है, तो वह अपने साथ दो आवश्यक गुण लाता है: कौशल और ज्ञान। कौशल अर्जित किए जा सकते हैं, स्थानांतरित किए जा सकते हैं या बाहरी स्रोतों से लिए जा सकते हैं। लेकिन ज्ञान संदर्भगत होता है और संस्था के भीतर गहराई से निहित रहता है। संसदीय ज्ञान विशिष्ट होता है यह वाद-विवादों, निर्णयों, परंपराओं और संवैधानिक परिपाटियों के माध्यम से दशकों में निर्मित होता है। यही सिद्धांत समान रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी लागू होता है एआई के विकास में मानवों का संस्थागत ज्ञान महत्वपूर्ण है।

हरिवंश नारायण ने कहा संयम के बिना नवाचार जोखिम भरा है, जबकि नवाचार के बिना संयम ठहराव की ओर ले जाता है।” इसलिए, उन्होंने आगे कहा कि संसद को दोनों के बीच एक सावधानी पूर्ण और विचारशील संतुलन बनाए रखना चाहिए।भारतीय संसद में पहले से प्रचलित एआई के व्यावहारिक उपयोगों पर विस्तार से चर्चा करते हुए श्री हरिवंश ने 22 भाषाओं में संसदीय कार्यों से संबंधित दस्तावेजों के अनुवाद, संसदीय वाद-विवादों के विश्लेषण और प्रश्नों की संरचना के लिए मॉडलों के उपयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा बताया कि लगभग 48 हजार शब्दों से युक्त एक संसदीय भाषा शब्दकोश तैयार किया गया है, जिसे विशेष रूप से संसदीय उपयोग के लिए डिज़ाइन किए गए एक कस्टम एआई मॉडल में एकीकृत किया गया है। मानव अनुवादक पूरी तरह नियंत्रण में रहते हैं, और एआई एक सहायक उपकरण के रूप में कार्य कर रहा है।” हालांकि, उन्होंने कहा कि विधायी संदर्भ में “संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता सत्य पर आधारित, नैतिकता से परिसीमित, मानव विवेक द्वारा निर्देशित और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उत्तरदायी होनी चाहिए।”

राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकरो और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और संसद का संचालन करने वालों की भूमिका निष्पक्ष बने जाने पर विभिन्न सत्रों में चर्चा की जा रही है । पेपरलेस , सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एक विशेष सत्र रखा गया ।

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