प्रार्थना सभा में आने वालों से सहमति पत्र मांग रहे महाराष्ट्र के गिरजाघर

धर्मांतरण रोधी कानून लागू होने के बाद बदली स्थिति
मुंबई का एक गिरजाघर
मुंबई का एक गिरजाघर
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मुंबई : महाराष्ट्र में धर्मांतरण रोधी कानून लागू होने के बाद मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) के गिरजाघरों ने प्रार्थना सभाओं में भाग लेने वाले लोगों से एक सहमति पत्र लेना शुरू कर दिया है। इस पत्र में लोगों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे अपनी स्वेच्छा से प्रार्थना में शामिल हो रहे हैं और उन पर कोई दबाव नहीं है। पड़ोसी जिले पालघर के वसई के पादरी सैम मथाई ने मंगलवार को कहा, ‘‘खुद के बचाव के लिए मांगे जा रहे इन सहमति पत्रों को चर्च के कार्यालयों में रखा जाएगा, ताकि सरकार या पुलिस अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर इन्हें दिखाया जा सके।’’

2-3 माह से जारी है व्यवस्था

उन्होंने बताया कि प्रार्थना में भाग लेने के लिए आने वालों से यह पत्र लेने की प्रक्रिया पिछले दो से तीन महीनों से जारी है। पादरी मथाई ने दावा किया कि पिछले छह महीनों में एमएमआर क्षेत्र, विशेषकर मुंबई से सटे वसई-विरार, पालघर, नालासोपारा और भायंदर जैसे इलाकों में गिरजाघरों पर हमलों की 11 घटनाएं सामने आई हैं।

लोग चर्च में घुसकर मारपीट करते हैं

उन्होंने कहा, ‘‘दक्षिणपंथी समूह बिना किसी सूचना के चर्चों में घुस आते हैं और लोगों के साथ मारपीट करते हैं। इसके बाद पादरियों और समुदाय के नेताओं ने मिलकर इसका समाधान निकालने का फैसला किया। हम किसी को भी यहां आकर प्रार्थना करने के लिए मजबूर नहीं करते हैं। भारतीय संविधान हर किसी को अपनी इच्छा से प्रार्थना करने की अनुमति देता है।’’

मथाई ने बताया कि एमएमआर में 4,000 से अधिक गिरजाघर हैं। कुछ चर्च उन लोगों से फॉर्म भरवा रहे हैं जो जन्म से ईसाई नहीं हैं, जबकि कुछ चर्च नियमित रूप से आने वाले सभी लोगों से भी यह फॉर्म भरवा रहे हैं।

30 जुलाई को लागू हुआ था धर्मांतरण रोधी कानून

महाराष्ट्र का धर्मांतरण रोधी कानून ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने और 30 जुलाई को आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी होने के बाद लागू हो गया है। यह कानून जबरन, धोखे से, प्रलोभन देकर या शादी के जरिए धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करता है।

नए कानून के तहत, दूसरे धर्म को अपनाने का इरादा रखने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचित करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर इस कानून में सात साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है। मुंबई के भांडुप के रहने वाले पादरी डेवडन त्रिभुवन ने कहा कि गिरजाघरों के पास प्रार्थना सभा में नियमित रूप से भाग लेने वालों का डेटाबेस मौजूद है।

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