उत्तराखंड होम गार्ड्स निदेशक को मुख्यमंत्री धामी ने वर्दी घोटाले में किया निलंबित

मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश भी जारी किए।
उत्तराखंड होम गार्ड्स निदेशक को मुख्यमंत्री धामी ने वर्दी घोटाले में किया निलंबित
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नयी दिल्ली : उत्तराखंड में जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री धामी ने होम गार्ड्स एवं नागरिक सुरक्षा विभाग में वर्दी सामग्री की खरीद प्रक्रिया में टेंडर अनियमितताओं की रिपोर्ट आने के बाद निदेशक होमगार्ड (डिप्टी कमांडेंट) अमिताभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश भी जारी किए। यह प्रकरण वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की खरीद प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया है, जिसमें पारदर्शिता के अभाव और नियमों के उल्लंघन के आरोप सामने आए।

राज्य सरकार द्वारा विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बीते तीन वर्षों में धामी सरकार ने यह दिखा दिया है कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारी भी जांच और दंड की प्रक्रिया से गुजरेंगे। हरिद्वार भूमि प्रकरण, भर्ती धांधली, वन विभाग, उद्यान, परिवहन, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन और कर विभाग जैसे 12 से अधिक मामलों में कई वरिष्ठ अधिकारियों पर निलंबन, गिरफ्तारी और विजिलेंस जांच जैसी सख्त कार्रवाइयाँ की गई हैं।

पहले जिन नामों पर सवाल उठाने से लोग हिचकते थे, आज वे भी कानून के दायरे में लाए जा रहे हैं। इन कार्रवाइयों को प्रशासनिक सख्ती से आगे बढ़कर सुशासन की दिशा में बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले हरिद्वार जमीन घोटाले में दो आईएएस , दो पीसीएस समेत कुल 12 कर्मी निलंबित किए गए थे।रामविलास यादव आईएएस को आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में जेल भेजा गया। वन विभाग से जुड़े दो वरिष्ठ अधिकारी किशन चंद और आरबीएस रावत को पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल भेजा गया।

भ्रष्टाचार पद ,के दुरूपयोग और आय से अधिक संपत्ति मामले में जेल जाने वाले अधिकारियों कर्मियों की सूची लंबी है। इन मामलों की श्रृंखला यह दर्शाती है कि उत्तराखंड में अब कार्रवाई व्यक्ति नहीं, कृत्य के आधार पर हो रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय की जा रही है और यह संदेश स्पष्ट रूप से स्थापित हो चुका है कि भ्रष्टाचार के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। नियमों से खिलवाड़ करने वालों के लिए केवल एक ही परिणाम तय है—सख्त कार्रवाई, चाहे पद कितना भी बड़ा या छोटा क्यों न हो।

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