चिड़ियाटापू में खुले समुद्र में पिंजरा पालन की सचिव ने समीक्षा की

समुद्री मत्स्य पालन विस्तार पर विभाग का विशेष जोर
Photo Caption for समाचार 3 — चिड़ियाटापू में खुले समुद्र में पिंजरा पालन परियोजना का निरीक्षण करते अधिकारी।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम - मत्स्य विभाग के सचिव ने अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के मत्स्य विभाग के अधिकारियों के साथ दक्षिण अंडमान के चिड़ियाटापू का दौरा किया। इस दौरान द्वीपों में चल रही वाणिज्यिक खुले समुद्र में पिंजरा पालन परियोजनाओं की समीक्षा की गई तथा निजी कंपनियों द्वारा संचालित समुद्री मत्स्य पालन संबंधी पहलों की प्रगति का आकलन किया गया।

वर्तमान में दो कंपनियां, एक्वा वर्ल्ड एक्सपोर्ट्स तथा कैनारेस एक्वाकल्चर एलएलपी, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के मत्स्य विभाग द्वारा पट्टे पर दिए गए समुद्री क्षेत्र में चिड़ियाटापू में पिंजरा पालन गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य द्वीपों में समुद्री मत्स्य पालन को बढ़ावा देना, मत्स्य गतिविधियों में विविधता लाना तथा समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग सुनिश्चित करना है।

इस पिंजरा पालन परियोजना में खुले समुद्र में पिंजरा पालन प्रणाली के तहत 10 मीटर व्यास वाले उच्च घनत्व पॉलीएथिलीन से निर्मित गोलाकार पिंजरों का उपयोग किया जा रहा है। यहां कुल आठ पिंजरे उपलब्ध हैं। इस परियोजना में मुख्य रूप से एशियाई सीबास अर्थात बारामुंडी मछली का पालन किया जा रहा है, जो व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मछली प्रजाति है।

दौरे के दौरान सचिव ने कंपनी द्वारा अपनाई जा रही मछलियों के भंडारण, वृद्धि, आहार व्यवस्था तथा पिंजरा प्रबंधन की प्रक्रियाओं की समीक्षा की। परियोजना के तहत 30 मई 2026 को लगभग 20 हजार एशियाई सीबास मछलियों के बीज को पहली बार पिंजरों में डाला गया था। उस समय मछलियों का आकार लगभग डेढ़ इंच और वजन करीब 0.4 ग्राम था। वर्तमान में मछलियों का औसत वजन अब लगभग 150 ग्राम तक पहुंच गया है। मछलियों को उच्च प्रोटीन और उच्च वसा युक्त आहार दिया जा रहा है तथा वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 20 किलोग्राम आहार की आवश्यकता हो रही है।

पहले चरण में डाली गई मछलियों के अप्रैल 2027 तक पकड़ने योग्य आकार में पहुंचने की संभावना है। हालांकि, यह मछलियों की वृद्धि तथा पालन की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। परियोजना के सफल क्रियान्वयन से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में खुले समुद्र में पिंजरा पालन को एक व्यवहार्य समुद्री मत्स्य पालन गतिविधि के रूप में प्रदर्शित करने तथा टिकाऊ समुद्री जलीय कृषि में अधिक लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।

सचिव ने पिंजरा प्रबंधन से जुड़े संचालन संबंधी पहलुओं की भी समीक्षा की, जिसमें मछलियों की वृद्धि, आहार देने की प्रक्रिया, मछलियों के भंडार का रखरखाव तथा पूरे स्थल का प्रबंधन शामिल रहा। विभाग ने उचित संख्या में मछलियों का पालन करने, मछलियों के स्वास्थ्य और वृद्धि की नियमित निगरानी, वैज्ञानिक तरीके से आहार देने, पिंजरों के रखरखाव तथा निर्धारित पर्यावरणीय और जैव सुरक्षा उपायों का पालन करने के महत्व पर जोर दिया।

चिड़ियाटापू में शुरू की गई खुले समुद्र में पिंजरा पालन पहल समुद्री मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने और तकनीक आधारित तथा टिकाऊ जलीय कृषि पद्धतियों की संभावनाओं को प्रदर्शित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मत्स्य विभाग वर्तमान में समुद्री मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए खुले पिंजरा पालन तथा समुद्री शैवाल पालन के रूप में और अधिक स्थलों के आवंटन की प्रक्रिया में है। इसमें टिकाऊ उत्पादन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी तथा मत्स्य क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

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