

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : BRICS में दुनिया की तीन सबसे शक्तिशाली पारंपरिक सैन्य ताकतें—रूस, चीन और भारत—शामिल हैं। क्या 11 सदस्यीय यह समूह अपनी विशाल रक्षा औद्योगिक क्षमता और सैन्य शक्ति को भविष्य में किसी गहरे रणनीतिक सहयोग में बदल सकता है ? यह संभव है या केवल एक दूर की संभावना ?
BRICS का शिखर सम्मेलन होने वाला है। हालांकि रक्षा BRICS के औपचारिक सहयोग का क्षेत्र नहीं है, लेकिन यह तथ्य नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि इस समूह में दुनिया की कई बड़ी सैन्य शक्तियां शामिल हैं।
BRICS के 11 सदस्य हैं—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
BRICS मुख्य रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक समन्वय का मंच है। इसके पास NATO जैसी कोई सामूहिक रक्षा व्यवस्था नहीं है और न ही सदस्य देशों के बीच एक-दूसरे की रक्षा करने की बाध्यता है।
फिर भी, इसके विस्तार के कारण इस समूह में सैन्य क्षमता, रक्षा उद्योग, सैनिकों की संख्या, रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और आर्थिक संसाधनों का असाधारण संकेंद्रण हो गया है।
2026 के Global Firepower आकलन के अनुसार, रूस BRICS का सबसे शक्तिशाली सैन्य देश है और दुनिया में दूसरे स्थान पर है। उसका Power Index 0.0791 है।
रूस के पास बड़ी थल सेना, भारी संख्या में तोपें और बख्तरबंद वाहन, बड़ी वायुसेना और शक्तिशाली नौसेना है। उसकी सक्रिय सैन्य क्षमता लगभग 13.2 लाख सैनिकों की है।
रूस का रक्षा उद्योग भी दुनिया के सबसे बड़े रक्षा उद्योगों में शामिल है। वह लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस सिस्टम, बख्तरबंद वाहन, मिसाइल, तोपखाने और नौसैनिक प्लेटफॉर्म बनाता है।
SIPRI के अनुसार, रूस ने 2025 में करीब 190 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए, जो उसकी GDP का लगभग 7.5% था।
2026 के Global Firepower आकलन में चीन दुनिया में तीसरे स्थान पर है। उसका Power Index 0.0919 है।
चीन की People's Liberation Army में लगभग 20.35 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जो BRICS के सभी सदस्यों में सबसे अधिक हैं।
पिछले कुछ दशकों में चीन ने अपनी नौसेना, वायु एवं अंतरिक्ष क्षमता और मिसाइल शक्ति में तेजी से विस्तार किया है। उसकी सैन्य औद्योगिक उत्पादन क्षमता भी बहुत बड़ी है।
जहाजों की संख्या के आधार पर चीन की नौसेना दुनिया में सबसे बड़ी है।
SIPRI के अनुसार, चीन ने 2025 में करीब 336 अरब डॉलर सैन्य खर्च किया, जो अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरा सबसे अधिक सैन्य खर्च था।
2026 के Global Firepower Ranking में भारत चौथे स्थान पर है। उसका Power Index 0.1346 है।
भारत के पास लगभग 14.3 लाख सक्रिय सैनिक हैं और वह दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है।
भारत अपनी नौसैनिक और वायु क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। इसमें विमानवाहक पोत, पनडुब्बियां, लड़ाकू विमान, मिसाइल, ड्रोन और स्वदेशी रक्षा प्रणालियां शामिल हैं।
भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं रहना चाहता, बल्कि एक महत्वपूर्ण रक्षा निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
SIPRI के अनुसार, भारत ने 2025 में करीब 92.1 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9% अधिक था। यह दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च था।
इस तरह रूस, चीन और भारत Global Firepower Ranking में लगातार दूसरे, तीसरे और चौथे स्थान पर हैं। यह BRICS के भीतर पारंपरिक सैन्य शक्ति का असाधारण संकेंद्रण दिखाता है।
ब्राजील Global Firepower में 11वें स्थान पर है और लैटिन अमेरिका का सबसे शक्तिशाली सैन्य देश है।
उसके पास लगभग 3.76 लाख सक्रिय सैनिक हैं तथा मजबूत थल, वायु और नौसैनिक क्षमताएं हैं।
ब्राजील का पनडुब्बी कार्यक्रम दक्षिण अटलांटिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
2025 में ब्राजील ने लगभग 23.9 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए।
इंडोनेशिया Global Firepower में 13वें स्थान पर है। उसके पास लगभग 4.04 लाख सक्रिय सैनिक हैं।
हजारों द्वीपों वाले विशाल द्वीपसमूह के कारण इंडोनेशिया के लिए नौसैनिक और वायु शक्ति बेहद महत्वपूर्ण है।
उसकी रणनीतिक स्थिति हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के पास है।
2025 में इंडोनेशिया का सैन्य खर्च करीब 15 अरब डॉलर रहा।
ईरान Global Firepower में 16वें स्थान पर है और उसका Power Index 0.3199 है।
ईरान के पास लगभग 6.1 लाख सक्रिय सैनिक हैं। लेकिन उसकी वास्तविक सैन्य क्षमता को केवल पारंपरिक सैन्य रैंकिंग से समझना मुश्किल है।
ईरान के पास बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और असममित नौसैनिक युद्ध की क्षमता है।
2025 में उसका सैन्य खर्च लगभग 7.4 अरब डॉलर था। हालांकि SIPRI का मानना है कि आधिकारिक आंकड़े वास्तविक खर्च को कम दर्शा सकते हैं।
मिस्र Global Firepower में 19वें स्थान पर है।
उसके पास लगभग 4.38 लाख सक्रिय सैनिक हैं, साथ ही बड़ी रिजर्व और अर्धसैनिक क्षमताएं भी हैं।
मिस्र के पास बड़ी संख्या में टैंक, तोपें और विमान हैं। उसकी नौसेना भूमध्यसागर और लाल सागर दोनों क्षेत्रों में रणनीतिक महत्व रखती है।
इसके अलावा स्वेज नहर मिस्र को सैन्य और भू-रणनीतिक दृष्टि से अतिरिक्त महत्व देती है।
सऊदी अरब Global Firepower में 25वें स्थान पर है।
उसके पास लगभग 2.47 लाख सक्रिय सैनिक हैं, लेकिन उसके सैनिकों को अत्याधुनिक पश्चिमी लड़ाकू विमान, बख्तरबंद वाहन और एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध हैं।
सऊदी अरब की सैन्य शक्ति में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उसका बड़ा रक्षा बजट निभाता है।
SIPRI के अनुसार, सऊदी अरब ने 2025 में लगभग 83.2 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए। यह दुनिया में आठवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च था और उसकी GDP का लगभग 6.5% था।
दक्षिण अफ्रीका Global Firepower में 40वें स्थान पर है और उसके पास लगभग 69,000 सक्रिय सैनिक हैं। उसकी सेना को शांति अभियानों और क्षेत्रीय अभियानों का अनुभव है।
इथियोपिया 47वें स्थान पर है और उसके पास लगभग 5.03 लाख सक्रिय सैनिक हैं। वह अफ्रीका की बड़ी सैन्य शक्तियों में से एक है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) 54वें स्थान पर है। उसके पास लगभग 65,000 सक्रिय सैनिक हैं, लेकिन उसकी सेना अत्यधिक आधुनिक है। उसके पास उन्नत विमान, एयर डिफेंस सिस्टम और विशेष बल हैं तथा उसे विदेशों में सैन्य अभियानों का भी अनुभव है।
अगर BRICS अपनी सैन्य ताकत को एक साथ कर दे तो?
यह फिलहाल एक दूर की संभावना है, लेकिन आंकड़े काफी प्रभावशाली हैं।
11 BRICS देशों में दुनिया की शीर्ष चार पारंपरिक सैन्य शक्तियों में से तीन—रूस, चीन और भारत शामिल हैं।
इसके अलावा ब्राजील और इंडोनेशिया दुनिया की शीर्ष 15 सैन्य शक्तियों में हैं, जबकि ईरान और मिस्र शीर्ष 20 में आते हैं।
इन देशों का संयुक्त सैन्य खर्च भी बहुत बड़ा है। केवल चीन, रूस, भारत, सऊदी अरब, ब्राजील, इंडोनेशिया और ईरान का कुल सैन्य खर्च लगभग 747 अरब डॉलर बैठता है।
लेकिन एक महत्वपूर्ण बात: आंकड़ों को जोड़ने से सैन्य गठबंधन नहीं बनता
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या ये देश अपनी सैन्य क्षमताओं को किसी एक साझा रणनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं?
फिलहाल ऐसा होने के बहुत कम संकेत हैं।
BRICS एक मुख्यतः अनौपचारिक व्यवस्था है। इसके पास NATO जैसा कोई सैन्य समझौता या सामूहिक रक्षा प्रावधान नहीं है।
इसके फैसले आम तौर पर सहमति (consensus) के आधार पर होते हैं और इसका मुख्य उद्देश्य राजनीतिक तथा कूटनीतिक समन्वय है।
BRICS देशों के बीच आपसी मतभेद