

अंजली भाटिया
नई दिल्ली : बिहार कांग्रेस में हाल के दिनों में उभरी अंदरूनी खींचतान और विधायकों के टूटने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक हुई, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहे। इस बैठक में बिहार कांग्रेस के सभी छह विधायक, सांसद, विधान पार्षद, प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी और बिहार से कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य शामिल हुए।
बिहार विधानसभा चुनाव के बाद लगातार कांग्रेस विधायकों के टूटने की खबरों से राजनीतिक हलचल तेज थी। इन्हीं अटकलों को विराम देने और संगठन में एकजुटता का संदेश देने के लिए पार्टी नेतृत्व ने सभी वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाया। बैठक के जरिए कांग्रेस ने साफ संकेत दिया कि बिहार में पार्टी पूरी तरह संगठित है और किसी तरह की टूट की आशंका निराधार है। बैठक के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बिहार कांग्रेस के सभी विधायक बैठक में शामिल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायकों के पार्टी छोड़ने की खबरें पूरी तरह भ्रामक और बेबुनियाद हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस के बारे में जानबूझकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिनका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में राहुल गांधी ने बिहार को लेकर पार्टी नेताओं को साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक अवसर मौजूद है, लेकिन इसके लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा। राहुल गांधी ने जोर दिया कि पार्टी को अपना खोया हुआ राजनीतिक स्पेस दोबारा हासिल करना है और नकारात्मक राजनीति से दूर रहना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बिहार में जल्द ही कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया जाएगा, ताकि संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।
बैठक में राहुल गांधी ने नेताओं से कहा कि अब केवल पद और जिम्मेदारी से काम नहीं चलेगा। पार्टी को मजबूत करने के लिए गांव-गांव और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ानी होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी पार्टी को उनकी जरूरत होगी, वे खुद वहां मौजूद रहेंगे। बैठक में वरिष्ठ नेता तारिक अनवर और राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन ने संगठन में जवाबदेही तय करने पर जोर दिया। वहीं बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा ने नशा, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था को राज्य के बड़े मुद्दे बताते हुए इन्हें आंदोलन और राजनीति का केंद्र बनाने का सुझाव दिया।
बैठक में शामिल निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के बयान ने भी सियासी हलचल बढ़ाई। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस को बिहार में सत्ता की ओर बढ़ना है, तो उसे अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करनी होगी। हालांकि पार्टी के भीतर इसे सहयोगी दलों पर रणनीतिक दबाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
आगे की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अगले कुछ महीनों में बिहार में संगठनात्मक ढांचे में बदलाव, मुद्दा आधारित आंदोलनों की शुरुआत, और नए राजनीतिक समीकरणों पर गंभीरता से काम कर सकती है। राहुल गांधी का यह कहना कि “जहां जरूरत होगी, मैं खुद मौजूद रहूंगा”, साफ संकेत देता है कि बिहार अब कांग्रेस के लिए सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि पार्टी के पुनरुत्थान की अहम प्रयोगशाला बनता जा रहा है