गैस संकट से जूझ रहा बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग

वैकल्पिक ईंधन तलाशने की चुनौती
Bangladesh's textile industry grappling with gas crisis
कपड़ा फैक्ट्री में काम करते कर्मचारी
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ढाका : मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण ऊर्जा की ऊंची कीमतों से पहले ही जूझ रहे बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पिछले महीने देश के दो गैस आयात टर्मिनलों में से एक में आग लगने के बाद ऊर्जा संकट गहरा गया। इसके चलते कपड़ा उद्योग के सामने उत्पादन जारी रखने के लिए वैकल्पिक ईंधन तलाशने की चुनौती खड़ी हो गई है। बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में करीब 40 लाख लोग कार्यरत हैं। यह क्षेत्र देश के कुल औद्योगिक रोजगार का बड़ा हिस्सा है और करीब 80 प्रतिशत निर्यात तथा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 13 प्रतिशत योगदान देता है। कपड़ा उद्योग में कपड़ों की धुलाई, रंगाई और फिनिशिंग जैसे कामों के लिए गैस पर भारी निर्भरता है। देश में स्थानीय गैस उत्पादन घटने और आयात की लागत बढ़ने के कारण लंबे समय से गैस की कमी बनी हुई है। दुनिया के प्रमुख तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यातकों में शामिल कतर ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने और कतर के LNG निर्यात प्रतिष्ठानों पर ईरान के हमलों के कारण बांग्लादेश को होने वाली गैस आपूर्ति में कटौती होगी। पेट्रोबांग्ला के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने बांग्लादेश के दो LNG टर्मिनलों में से एक में आग लगने के बाद गैस आपूर्ति घटकर मांग के आधे से कुछ अधिक रह गई। इसका असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ रहा है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के निदेशक मोहम्मद खुर्शीद आलम के मुताबिक, सावर, आशुलिया और नारायणगंज के औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कारखाने अपनी क्षमता से करीब 40 प्रतिशत कम उत्पादन कर रहे हैं।

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