

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम - अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के सांसद श्री बिष्णु पद रे ने आयुष्मान भारत योजना के तहत रेफर किए जाने वाले मरीजों के लिए वित्तीय सहायता और उपलब्ध सुविधाओं में वृद्धि किए जाने पर भारत सरकार तथा अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
आज 03 सितंबर 2026 को सांसद कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत रेफर किए जाने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने 21 अक्टूबर 2025 को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल के समक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए थे।
राज्य स्वास्थ्य सोसायटी की जनरल बॉडी बैठक में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई चर्चाओं के बाद सांसद द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विचार किया गया और रेफरल मामलों से संबंधित मौजूदा दिशा-निर्देशों में संशोधन के लिए उचित निर्णय लिए गए।
इन फैसलों का उद्देश्य आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर होने वाले और सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार के लिए रेफर किए गए मरीजों के हितों की सुरक्षा करना है। स्वास्थ्य सचिव, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन द्वारा 28 अगस्त 2026 को सांसद को भेजे गए लिखित पत्र में इसकी पुष्टि की गई है।
01 अगस्त 2026 से प्रभावी इन संशोधित सुविधाओं और दिशा-निर्देशों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पात्रता के लिए आय सीमा से संबंधित है। आयुष्मान भारत योजना के तहत आय सीमा को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे पात्र लाभार्थी 5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार प्राप्त कर सकेंगे।
मरीज और उनके साथ जाने वाले एक व्यक्ति के लिए पहले उपलब्ध जहाज किराया सुविधा में भी संशोधन किया गया है। अब मरीज और एक अटेंडेंट को अधिकतम 40,000 रुपये की प्रतिपूर्ति सीमा के अधीन इकोनॉमी क्लास से हवाई यात्रा करने की अनुमति दी गई है।
मजदूरी नुकसान मुआवजे के प्रावधान में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले कुछ विशेष श्रेणियों तक सीमित 1,000 रुपये प्रतिदिन, अधिकतम 20 दिनों तक का वेतन नुकसान मुआवजा अब योजना के तहत रेफर किए गए सभी श्रेणियों के मरीजों के लिए लागू कर दिया गया है।
स्ट्रेचर शुल्क के संबंध में भी राहत प्रदान की गई है। बिना किसी निर्धारित सीमा के स्ट्रेचर शुल्क की व्यवस्था प्रशासन द्वारा अग्रिम रूप से की जाएगी और इसका भुगतान भी प्रशासन करेगा। इसके परिणामस्वरूप मरीजों को यह खर्च अपनी जेब से वहन नहीं करना पड़ेगा।
हवाई अड्डे या बंदरगाह से मरीजों के परिवहन के लिए एंबुलेंस या कैब का 3,000 रुपये तक का शुल्क भी प्रतिपूर्ति के तहत उपलब्ध होगा।
गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एयर एंबुलेंस के माध्यम से बाहर ले जाने की आवश्यकता होने पर इसका खर्च प्रशासन द्वारा वहन किया जाएगा। संबंधित सरकारी एजेंसियों के साथ समझौते के माध्यम से इस व्यवस्था को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है।
जी.बी. पंत अस्पताल में एमआरआई सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव भी अंतिम चरण में पहुंच गया है और इसके लिए आवश्यक कदम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं।
इसके अलावा, मरीजों को दवाइयों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 30 करोड़ रुपये निर्धारित करने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। इसके तहत उचित और निरंतर आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मरीजों को दवाइयों की कमी के कारण निजी मेडिकल दुकानों से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।
सांसद ने एक बार फिर इन महत्वपूर्ण कदमों के लिए भारत सरकार और अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन उपायों से द्वीपों के मरीजों और उनके साथ जाने वाले लोगों को महत्वपूर्ण राहत मिलेगी, विशेषकर उन मरीजों को जिन्हें द्वीपों के बाहर रेफरल उपचार के लिए जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि ये कदम अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लोगों के हितों और कल्याण की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।