

गुवाहाटी : गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम की एक महिला को कथित तौर पर उसके परिवार को सूचना दिए बिना बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में राज्य सरकार को उसके पति को 2 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने विदेश मंत्रालय (MEA) को भी मामले में पक्षकार बनाया है और बांग्लादेश में महिला का पता लगाने तथा उसे भारत वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा है, ताकि उसे फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देने का अवसर मिल सके। जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस सुष्मिता फुकन खाउंड की डिवीजन बेंच ने 3 सितंबर 2026 को पारित आदेश में कहा कि महिला को ट्रिब्यूनल की राय की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही उसके परिवार के वयस्क सदस्यों को उसकी गिरफ्तारी तथा भारत से निष्कासन की जानकारी दी गई। इसके कारण वह अपने खिलाफ दिए गए आदेश को समय रहते अदालत के समक्ष चुनौती देने के अधिकार से वंचित हो गई।
2019 में विदेशी घोषित की गई थी मुमताज बेगम
मामला नगांव जिले की रहने वाली मुमताज बेगम का है। उनके खिलाफ 2015 में मामला दर्ज किया गया था और 6 जून 2019 को नगांव के जुरिया स्थित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें विदेशी घोषित कर दिया था। हालांकि, इस आदेश को बाद में हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। हाई कोर्ट ने 20 अप्रैल 2026 को ट्रिब्यूनल की राय को रद्द कर दिया था। अदालत ने पाया था कि ट्रिब्यूनल ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों पर उचित चर्चा नहीं की थी। हाई कोर्ट ने मुमताज बेगम को 30 मई या उससे पहले ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। याचिका के अनुसार, मुमताज बेगम 30 मई को अपने वकील के साथ ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित हुईं और हाई कोर्ट के आदेश की जानकारी भी वहां दी गई। लेकिन उनके वकील के चले जाने के बाद जुरिया पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस स्टेशन से ट्रांजिट कैंप और फिर होल्डिंग सेंटर भेजा गया
मुमताज के पति मुजम्मेल हक ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उनकी पत्नी को पहले जुरिया पुलिस स्टेशन और उसके बाद नगांव सदर पुलिस स्टेशन में रखा गया। 31 मई को उन्हें गोलपाड़ा जिले के मटिया स्थित ट्रांजिट कैंप भेज दिया गया। बाद में उन्हें श्रीभूमि जिले के एरालीगूल स्थित होल्डिंग सेंटर में स्थानांतरित किया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि मुमताज बेगम को कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए, ताकि यह जांच की जा सके कि उनकी हिरासत कानूनी थी या नहीं। याचिका में यह भी कहा गया कि 13 जून को मुमताज बेगम को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के हवाले कर दिया गया।
14 जून की आधी रात के बाद बांग्लादेश भेजे जाने का दावा
हाई कोर्ट के 3 सितंबर के आदेश के मुताबिक, BSF ने अपने हलफनामे में कहा कि मुमताज बेगम को 14 जून 2026 को बांग्लादेश वापस भेज दिया गया था। हलफनामे में बताया गया कि यह कार्रवाई कछार जिले के कलाइनचेरा इलाके में आधी रात के करीब 10 मिनट बाद हुई। इस घटनाक्रम पर हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि जिस महिला को विदेशी घोषित किया गया था, उसे संबंधित आदेश की प्रति उपलब्ध कराने और उसके परिवार को उसकी हिरासत तथा निष्कासन के बारे में जानकारी देने में अधिकारियों की विफलता के कारण उसे कानूनी उपाय अपनाने का प्रभावी अवसर नहीं मिला।
अनुच्छेद 21 का हवाला
डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है और इसका संरक्षण केवल भारतीय नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि गैर-नागरिकों को भी मिलता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ विदेशी होने की राय दिए जाने के बावजूद उसे उस आदेश की जानकारी और उसे चुनौती देने के लिए उपलब्ध कानूनी उपायों का अवसर दिया जाना जरूरी है।
पति को 2 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा
अदालत ने कहा कि चूंकि हिरासत में ली गई महिला को उसके पति या परिवार के किसी वयस्क सदस्य को उसकी हिरासत की जानकारी दिए बिना भारत से बाहर भेज दिया गया, इसलिए अंतरिम राहत के तौर पर राज्य सरकार को उसके पति मुजम्मेल हक को 2 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देना होगा। यह राशि हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के 60 दिनों के भीतर भुगतान करनी होगी। अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि यह अंतरिम मुआवजा याचिकाकर्ता के उस अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा, जिसके तहत वह किसी सिविल कोर्ट के समक्ष अलग से मुआवजे की मांग कर सकता है।
MEA को महिला का पता लगाने और वापस लाने का निर्देश
हाई कोर्ट ने मामले में विदेश मंत्रालय (MEA) को प्रतिवादी के तौर पर शामिल करने का निर्देश दिया। अदालत का उद्देश्य बांग्लादेश में मुमताज बेगम का पता लगाने और उन्हें भारत वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाना है। अदालत ने कहा कि महिला को वापस लाकर उसे उचित कानूनी राहत लेने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसमें जरूरत पड़ने पर वकील की सलाह लेकर हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की राय को चुनौती देने का अवसर भी शामिल है।
ट्रिब्यूनल सदस्य के खिलाफ दुर्भावना का मामला
अदालत ने नगांव के जुरिया स्थित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के सदस्य के आचरण पर भी गंभीर टिप्पणी की। बेंच ने कानून के तहत दुर्भावना (mala fide) के पहलू को नोट किया, क्योंकि ट्रिब्यूनल की राय की प्रमाणित प्रति देने में कथित तौर पर देरी हुई थी। आदेश के अनुसार, प्रमाणित प्रति के लिए 2 जून को आवेदन किया गया था, लेकिन उसकी प्रति 5 जून को उपलब्ध कराई गई। अदालत ने इस देरी के पीछे के कारणों की जांच की जरूरत बताई है।
राय कब तैयार हुई, सरकार से मांगी जानकारी
हाई कोर्ट ने असम सरकार के गृह एवं राजनीतिक विभाग को यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में 30 मई की राय वास्तव में किस तारीख और किस समय तैयार की गई थी। अदालत इस पहलू की भी जांच कर रही है कि ट्रिब्यूनल की राय तैयार होने, उसकी प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन करने और महिला को हिरासत में लेने के बीच क्या परिस्थितियां थीं।
अब घोषित विदेशियों की हिरासत को लेकर अहम निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अंतरिम उपाय के तौर पर असम के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (बॉर्डर) को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित किए जाने के बाद हिरासत में लेने से पहले:
- उसे फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की राय के बारे में जानकारी दी जाए;
- ट्रिब्यूनल की राय की एक प्रति संबंधित व्यक्ति को दी जाए;
- व्यक्ति को जिले से बाहर ले जाने से पहले उसके परिवार के वयस्क सदस्यों को इसकी सूचना दी जाए।
इन निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित किए जाने के बाद भी उसके कानूनी अधिकारों और न्यायिक उपायों का प्रभावी अवसर मिले।
24 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। इस दौरान महिला का पता लगाने और उसकी भारत वापसी के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों समेत अन्य संबंधित पहलुओं पर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यह मामला असम में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेशों के बाद होने वाली हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया में कानूनी प्रक्रिया, परिवार को सूचना देने और न्यायिक उपाय उपलब्ध कराने के महत्व को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।