खेती को हाईटेक बनाने के लिए किसानों ने मांगा तकनीकी सहयोग

खेती को हाईटेक बनाने के लिए किसानों ने मांगा तकनीकी सहयोग
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अरुणाचल प्रदेश: खेती में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ प्रगतिशील किसानों ने कृषि विभाग और विशेषज्ञ संस्थानों से तकनीकी सहायता मजबूत करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि नई कृषि तकनीक, उन्नत बीज, आधुनिक सिंचाई प्रणाली, मृदा परीक्षण और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन को अपनाकर उत्पादन और किसानों की आय में सुधार किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए समय पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और खेत स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। किसानों के मुताबिक खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। मौसम में बदलाव, बढ़ती उत्पादन लागत, कीट एवं रोगों का प्रकोप और कृषि उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक कृषि पद्धतियों पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक और तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।

खेत तक पहुंचे कृषि विशेषज्ञ

प्रगतिशील किसानों ने कहा कि कृषि विभाग के विशेषज्ञों और वैज्ञानिक संस्थानों का किसानों के साथ नियमित संवाद होना चाहिए। नई तकनीकों की जानकारी केवल बैठकों, पुस्तिकाओं या सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि किसानों को खेतों में उनका व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। किसानों के अनुसार कई बार नई मशीनें, उन्नत बीज और तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद उनके सही इस्तेमाल की जानकारी नहीं होने से किसान उनका पूरा लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए गांव और फील्ड स्तर पर तकनीकी कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत है।

मृदा परीक्षण को बनाया जाए आसान

आधुनिक खेती में मृदा परीक्षण को किसानों ने बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि नियमित रूप से मिट्टी की जांच की सुविधा आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि खेत में मौजूद पोषक तत्वों और उनकी कमी की सही जानकारी मिल सके। मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरक का इस्तेमाल करने से किसानों की लागत कम हो सकती है। साथ ही, इससे मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी। बदलते मौसम और कई इलाकों में पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए किसानों ने ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कम पानी में बेहतर सिंचाई करने वाली तकनीक उत्पादन बढ़ाने और जल संरक्षण दोनों में मददगार हो सकती है। हालांकि, इन प्रणालियों की स्थापना, रखरखाव और संचालन के लिए किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत होगी। किसानों ने सरकारी योजनाओं और सब्सिडी जैसी उपलब्ध सहायता की जानकारी सरल भाषा में उन तक पहुंचाने की भी मांग की है।

कीट और रोग की पहचान पर मिले तत्काल सलाह

फसल में अचानक बीमारी या कीट लगने की स्थिति में सही विशेषज्ञ सलाह मिलने में देरी से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों ने ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसके जरिए वे सीधे कृषि विशेषज्ञों से संपर्क कर सकें। मोबाइल ऐप, हेल्पलाइन और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए किसान अपने खेत में दिखाई देने वाली समस्या की तस्वीर विशेषज्ञों को भेज सकते हैं। समय पर सलाह मिलने से अनावश्यक कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करने के साथ फसल को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकता है।

कृषि मशीनों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण जरूरी

कृषि क्षेत्र में छोटे ट्रैक्टर, ड्रोन, सीड ड्रिल और अन्य आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। किसानों के मुताबिक इन मशीनों से समय और श्रम दोनों की बचत होती है, लेकिन केवल मशीन उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है। किसानों को मशीनों के सुरक्षित और प्रभावी इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए। खासकर कृषि ड्रोन जैसी नई तकनीकों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए महंगी मशीनों को सामूहिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी कारगर हो सकती है। प्रगतिशील किसानों का मानना है कि कृषि विभाग, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के बीच मजबूत समन्वय से आधुनिक कृषि को तेजी से बढ़ावा दिया जा सकता है। किसानों को समय पर तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक सलाह और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तो उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती की लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

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