

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम -- अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह में लगातार हो रही बिजली कटौती और विद्युत आपूर्ति में बार-बार आने वाली बाधाओं को लेकर आवर राइट्स ऑर्गनाइजेशन ने उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने द्वीपसमूह में संचालित सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन, कार्यप्रणाली और वास्तविक उपलब्धियों की जांच के लिए स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है। संगठन के अध्यक्ष सी. सरवनन ने पत्र में कहा है कि विभिन्न क्षेत्रों में लगातार बिजली कटौती की समस्या आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है।
पत्र में उन्होंने ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि विद्युत विभाग की ओर से बिजली आपूर्ति में सुधार लाने और बार-बार होने वाली कटौती को कम करने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना सहित ऊर्जा बचत एवं विद्युत सहायता से जुड़ी कई पहल की गई हैं। इन परियोजनाओं से उम्मीद की गई थी कि द्वीपवासियों को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी। हालांकि, इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि खर्च किए जाने के बावजूद कई क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या लगातार बनी हुई है।
सरवनन ने कहा कि पर्याप्त सार्वजनिक धनराशि खर्च होने के बाद भी विद्युत आपूर्ति की विश्वसनीयता और निरंतरता में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। इससे इन सौर ऊर्जा परियोजनाओं की योजना बनाने, उन्हें लागू करने, संचालन की दक्षता, रखरखाव तथा समग्र कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। यह पता लगाना आवश्यक है कि क्या संबंधित परियोजनाएं निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप काम कर रही हैं, क्या उन पर खर्च की गई सार्वजनिक धनराशि का उचित उपयोग हुआ है और क्या इन योजनाओं का वास्तविक लाभ द्वीपवासियों तक पहुंच रहा है।
संगठन ने उपराज्यपाल से अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों तथा सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए। समिति को अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह में स्थापित सभी सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन और वर्तमान संचालन की वास्तविक स्थिति का व्यापक अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी जाए। इसके साथ ही परियोजनाओं की स्थापना, क्रियान्वयन और रखरखाव के लिए स्वीकृत, जारी तथा खर्च की गई धनराशि का विस्तृत तकनीकी एवं वित्तीय परीक्षण भी कराया जाए।
संगठन ने यह भी मांग की है कि प्रत्येक सौर ऊर्जा संयंत्र की वास्तविक बिजली उत्पादन क्षमता और संचालन संबंधी प्रदर्शन का आकलन किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित संयंत्र अपनी स्थापित क्षमता तथा स्वीकृत उद्देश्यों के अनुरूप बिजली उत्पादन कर रहे हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त, इन परियोजनाओं के लागू होने के बावजूद लगातार बिजली कटौती होने के कारणों की भी जांच की जाए। इसमें तकनीकी खराबियों, रखरखाव में कमी, कार्य पूरा करने में देरी, क्रियान्वयन संबंधी खामियों तथा अन्य संभावित कमियों का पता लगाने की मांग की गई है।
पत्र में संगठन ने कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही अथवा जिम्मेदारी में कमी सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों या एजेंसियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही लागू नियमों एवं कानून के अनुसार आवश्यक प्रशासनिक, वित्तीय अथवा कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। संगठन ने परियोजनाओं में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने तथा सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है, ताकि इन योजनाओं पर खर्च की गई बड़ी धनराशि का वास्तविक लाभ आम जनता को मिल सके।
श्री सरवनन ने कहा कि बिजली एक अत्यंत आवश्यक सार्वजनिक सेवा है और द्वीपसमूह के नागरिकों को भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति मिलना उनका उचित अधिकार है। वैकल्पिक ऊर्जा ढांचे पर पर्याप्त निवेश किए जाने के बावजूद लगातार बिजली कटौती होना गंभीर विषय है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने उपराज्यपाल से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर समयबद्ध एवं स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने तथा संबंधित परियोजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया है।