उत्तर एवं मध्य अंडमान पंचायतों ने उपराज्यपाल से 26 मांगों पर हस्तक्षेप मांगा

शक्ति, स्वास्थ्य, ढांचा और संपर्क सुधारने की उठी मांग
उत्तर एवं मध्य अंडमान की जिला पंचायती राज संस्था संघ के प्रतिनिधि ने उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा को 26 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर हस्तक्षेप की अपील की।
उत्तर एवं मध्य अंडमान की जिला पंचायती राज संस्था संघ के प्रतिनिधि ने उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा को 26 सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर हस्तक्षेप की अपील की।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम --उत्तर एवं मध्य अंडमान की जिला पंचायती राज संस्था संघ ने उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा से 26 सूत्रीय मांगपत्र पर हस्तक्षेप की अपील की है। मांगपत्र में पंचायती राज संस्थाओं को अधिक अधिकार और वित्तीय स्वायत्तता देने के साथ स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, रोजगार, संपर्क, प्रशासनिक व्यवस्था तथा स्थानीय विकास से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं।

ग्राम पंचायत स्वदेश नगर के प्रधान तथा जिला पंचायती राज संस्था संघ के महासचिव देबब्रत दास ने लोक निवास में यह मांगपत्र सौंपा। उन्होंने उत्तर एवं मध्य अंडमान की भौगोलिक परिस्थितियों, कठिन भूभाग, सीमित संपर्क व्यवस्था, अधिक जीवन-यापन लागत तथा तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों की कमी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए द्वीपों में पंचायती राज संस्थाओं को अधिक प्रभावी अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है।

संघ ने संविधान के भाग-IX की भावना के अनुरूप पंचायती राज संस्थाओं को अधिक शक्तियां, कार्य, कर्मचारी और वित्तीय संसाधन सौंपने की मांग की है। मांगपत्र में विशेष रूप से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह पंचायती राज संस्थाओं को अनुदान संबंधी वर्ष 2025 के प्रारूप नियमों को अंतिम रूप देने से पहले पंचायतों की ओर से दिए गए सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने की मांग की गई है। संघ ने अनुदान के निष्पक्ष आवंटन, समयबद्ध मंजूरी और निर्वाचित स्थानीय निकायों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने पर जोर दिया है।

मांगपत्र में ग्राम सभा के निर्णय से लेकर ई-ग्राम स्वराज पर ग्राम पंचायत विकास योजना की स्वीकृति, उपयोगिता प्रमाणपत्र और अनुदान जारी होने तक लगने वाले समय को कम करने की मांग की गई है। संघ ने प्रधानों को नियंत्रित आपातकालीन वित्तीय अधिकार देने का सुझाव भी दिया है, जिसके बाद सूचना, अनुमोदन और लेखा परीक्षण की व्यवस्था हो। जिन स्वीकृत कार्यों को धन की कमी के कारण पूरा नहीं किया जा पा रहा है, वहां पात्र मदों के बीच धन के अधिक लचीले उपयोग की व्यवस्था की मांग भी की गई है।

संघ ने पंचायती राज संस्थाओं के विभिन्न स्तरों पर प्रशासनिक स्वीकृति और व्यय अनुमति की वित्तीय सीमा में संशोधन तथा इसे समय-समय पर लागत सूचकांक अथवा दर अनुसूची से जोड़ने की मांग की है। मायाबंदर में पर्याप्त तकनीकी कर्मचारियों के साथ मजबूत अभियांत्रिकी शाखा, छोटे ग्राम स्तरीय कार्यों के स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन तथा सार्वजनिक कार्यों में वास्तविक स्थानीय सहकारी संस्थाओं की भागीदारी और सुरक्षा की मांग भी रखी गई है।

मांगपत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के लिए पहुंच मार्ग, बिजली और घरेलू जल कनेक्शन को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर संघ ने श्री विजय पुरम में अंतरद्वीपीय रोगियों, उनके साथ आने वाले परिजनों तथा विशेष उपचार के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए सस्ती अस्थायी आवास व्यवस्था की मांग की है। दूरदराज के क्षेत्रों, विशेषकर बिलीग्राउंड जैसे इलाकों में स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने तथा आवश्यकता के अनुसार जांच और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा गया है।

गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में अंतरद्वीपीय रोगियों के लिए अलग आपात एवं रेफरल सहायता कक्ष बनाने की मांग भी की गई है। संघ के अनुसार यह कक्ष रेफरल की जांच, भर्ती, शय्या आवंटन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय में मदद कर सकता है। रेफर किए गए मरीजों के लिए अलग बाह्य रोगी विभाग की व्यवस्था का सुझाव भी दिया गया है।

अन्य मांगों में विद्युत विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए क्रेन युक्त उपयोगी वाहन, मायाबंदर स्थित महात्मा गांधी सरकारी महाविद्यालय में व्यवसाय प्रशासन एवं प्रबंधन जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करना, रसोई गैस की नियमित आपूर्ति, मायाबंदर और डिगलीपुर के लिए कोलकाता तक भरोसेमंद यात्री-सह-मालवाहक जलयान सेवा तथा आधुनिक अंतरद्वीपीय नौका सेवा उपलब्ध कराना शामिल है।

संघ ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए आय सीमा की समीक्षा, पटवारी स्तर पर प्रमाणित निवास अभिलेख, भूमि आवंटन प्रक्रिया की समीक्षा, डोमिसाइल अथवा निवास संबंधी स्पष्ट व्यवस्था, सरकारी नौकरियों में आयु सीमा में छूट की समीक्षा, अंडमान एवं निकोबार लोक सेवा आयोग की स्थापना तथा केंद्रशासित प्रदेश के लिए उपयुक्त विधायी संस्था पर विचार करने की मांग भी की है।

अनुदान नियमों के संबंध में संघ ने 30 से 45 दिनों की स्वीकृति अवधि, निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर मानी गई स्वीकृति, विभिन्न स्तरों पर वित्तीय अधिकारों का विकेंद्रीकरण, वास्तविक स्थानीय सहकारी संस्थाओं को प्राथमिकता और 60 से 70 प्रतिशत स्थानीय श्रम की भागीदारी जैसे प्रस्ताव रखे हैं। संघ ने कार्यों को कृत्रिम रूप से छोटे हिस्सों में बांटकर वित्तीय नियमों से बचने और धन की कमी के कारण वैध रूप से चरणबद्ध तरीके से कार्य कराने के बीच स्पष्ट अंतर करने की मांग भी की है।

संघ ने अपने मांगपत्र में कहा है कि पंचायती राज संस्थाओं को केवल सरकारी योजनाओं की क्रियान्वयन एजेंसी के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए मजबूत ग्राम सभा भागीदारी, वित्तीय स्वायत्तता, समयबद्ध स्वीकृति और कार्यपालिका के विवेकाधिकार को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

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