मुर्गियों की चोंच काटने की गर्म ब्लेड प्रक्रिया पर रोक लगाने की सलाह

पशु कल्याण के लिए इन्फ्रारेड तकनीक अपनाने पर जोर
अंडमान में स्थित एक मुर्गी पालन केंद्र की तस्वीर।
अंडमान में स्थित एक मुर्गी पालन केंद्र की तस्वीर।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम – अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने मुर्गी पालन में पशु कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुर्गियों की चोंच काटने की पारंपरिक गर्म ब्लेड प्रक्रिया के स्थान पर मानवीय विकल्प अपनाने की सलाह जारी की है।

विभाग के निदेशक ने सभी व्यावसायिक हैचरी और मुर्गी के चूजों की आपूर्ति करने वाले विक्रेताओं से निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा पक्षियों के प्रति क्रूरता रहित पालन पद्धतियों को बढ़ावा देने का आग्रह किया है।

विभाग की ओर से जारी परामर्श में बताया गया है कि मुर्गी पालन केंद्रों में एक-दूसरे को चोंच मारकर घायल करने और पक्षियों में आपसी नरभक्षण जैसी घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए चोंच काटने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि, गर्म ब्लेड के माध्यम से चोंच काटने की पारंपरिक प्रक्रिया से पक्षियों को दर्द, ऊतकों को नुकसान, तनाव और लंबे समय तक रहने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इससे उनके भोजन ग्रहण करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। विभाग ने इसे पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(1) के प्रावधानों के संदर्भ में पशु कल्याण से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

परामर्श में गर्म ब्लेड से चोंच काटने की प्रक्रिया को नियमित पालन पद्धति के रूप में हतोत्साहित करने की सलाह दी गई है। इसके स्थान पर इन्फ्रारेड बीक ट्रीटमेंट (आईआरबीटी) तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया है। इस तकनीक के तहत हैचरी स्तर पर एक दिन के चूजों की चोंच के सिरे पर केंद्रित अवरक्त किरणों के माध्यम से उपचार किया जाता है। इसके बाद लगभग दो से तीन सप्ताह के भीतर चोंच का उपचारित सिरा प्राकृतिक रूप से अलग हो जाता है और इस प्रक्रिया में खुला घाव नहीं बनता।

विभाग के अनुसार, इन्फ्रारेड तकनीक से उपचारित मुर्गियों में गर्म ब्लेड से चोंच काटे गए पक्षियों की तुलना में बेहतर शारीरिक वजन, भोजन ग्रहण करने की क्षमता और चारे के बेहतर उपयोग के परिणाम देखे गए हैं। इससे पक्षियों के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता में सुधार के साथ अनावश्यक दर्द एवं पीड़ा को कम करने में मदद मिल सकती है।

विभाग ने मुर्गी पालकों को आपसी चोंच मारने और नरभक्षण की घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर प्रबंधन व्यवस्था अपनाने की भी सलाह दी है। इसके तहत पक्षियों के लिए पर्याप्त जगह, उचित संख्या में पक्षियों का पालन, संतुलित पोषण, अनुकूल प्रकाश व्यवस्था और बेहतर वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

निदेशक, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने सभी व्यावसायिक हैचरी संचालकों, चूजा आपूर्तिकर्ताओं और मुर्गी पालकों से इन दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा पशु कल्याण और मानवीय पालन पद्धतियों को प्राथमिकता देने की अपील की है।

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