

सन्मार्ग संवाददाता
श्री विजय पुरम --
कार निकोबार में सूअरों के बीच फैल रहे क्लासिक सूअर ज्वर की स्थिति की समीक्षा और इसकी रोकथाम तथा नियंत्रण के लिए आगे की कार्रवाई तय करने के उद्देश्य से 07 अक्टूबर 2026 को निकोबार के उपायुक्त की अध्यक्षता में उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में मिश्रित माध्यम से उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं की निदेशक डॉ. देबालिना मित्रा, भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी विभाग की पशुधन स्वास्थ्य उप आयुक्त, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के अधिकारी, कार निकोबार के जनजातीय कप्तान तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं की संयुक्त निदेशक डॉ. सुजाता हेगड़े ने प्रतिभागियों का स्वागत किया।
पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं की क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. बलजीत कौर ने कार निकोबार के विभिन्न गांवों में सूअरों की मृत्यु की स्थिति और अब तक किए गए उपायों के बारे में बैठक को जानकारी दी। इनमें क्षेत्रीय निगरानी, सूचित मौतों का सत्यापन, रोग की जांच, नमूने एकत्र करना, जागरूकता गतिविधियां, पशु चिकित्सा सहायता तथा मृत पशुओं के शवों का सुरक्षित निपटान शामिल हैं।
डॉ. देबालिना मित्रा ने क्लासिक सूअर ज्वर की प्रकृति समझाते हुए कहा कि यह रोग मनुष्यों में नहीं फैलता और मानव स्वास्थ्य के लिए प्रत्यक्ष खतरा उत्पन्न नहीं करता। उन्होंने अनावश्यक घबराहट से बचने और निर्धारित रोग नियंत्रण, जैव सुरक्षा तथा निगरानी उपायों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी।
पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं की निदेशक ने बताया कि कार निकोबार में पहले क्लासिक सूअर ज्वर के विरुद्ध टीकाकरण किया गया था, लेकिन लगभग 2 दशकों तक द्वीप रोग के मामलों से मुक्त रहने के बाद टीकाकरण बंद कर दिया गया था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए 20,000 टीकों की मांग भेजी गई है। टीका प्राप्त होते ही विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। कार निकोबार के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष टीकाकरण दल तैनात किए जाएंगे और जनजातीय कप्तानों से अपने-अपने गांवों में पात्र सूअरों का टीकाकरण कराने में सहयोग करने का अनुरोध किया गया है।
निवारक उपाय के रूप में स्थिति नियंत्रण में आने तक द्वीप से सूअरों और सूअर उत्पादों की आवाजाही पर रोक रहेगी। सूअर पालकों को सलाह दी गई है कि वे बीमार या संदिग्ध सूअरों, सूअर के मांस अथवा मृत पशुओं को बेचें, ले जाएं या स्थानांतरित न करें। नए खरीदे गए सूअरों को पशु चिकित्सक की सलाह के बिना मौजूदा झुंड में शामिल नहीं किया जाए। सभी गांवों में दूसरे चरण का जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जन जागरूकता सूचना का निकोबारी भाषा में अनुवाद कर व्यापक प्रसार किया जाएगा। द्वीपभर में चलित वाहन के माध्यम से भी सार्वजनिक घोषणाएं की जाएंगी।
समन्वित निगरानी और सूचना देने के लिए प्रत्येक गांव में ग्राम स्तरीय कार्यबल का गठन किया जाएगा। जनजातीय कप्तानों से मृत्यु के आंकड़ों की दोबारा जांच और सत्यापन करने का अनुरोध किया गया है, क्योंकि कार निकोबार में कई सूअर वन क्षेत्रों में पाले जाते हैं और तत्काल भौतिक सत्यापन के लिए उपलब्ध नहीं हो सकते। विभाग को ग्राम कप्तानों के परामर्श से मृत पशुओं के शवों का सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करने तथा चूना, विरंजक चूर्ण और अन्य कीटाणुनाशक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। सहायक उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाओं का भंडार रखा जाएगा।
बैठक में आवश्यक रोग नियंत्रण उपायों को लागू करने के साथ भारत की पंजीकृत स्वदेशी नस्ल निकोबारी सूअर के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
सूअर पालकों और ग्रामीणों से अनुरोध किया गया है कि तेज बुखार, भूख में कमी, कमजोरी, दस्त, त्वचा के रंग में बदलाव, खांसी या अचानक मृत्यु जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत निकटतम पशु चिकित्सा कर्मी को सूचना दें। साथ ही पशुशालाओं को साफ रखें, अनावश्यक रूप से लोगों के प्रवेश को सीमित करें और टीकाकरण तथा निगरानी दलों को पूरा सहयोग दें।