‘बिम्सटेक’ देशों के बीच पहला समुद्री सुरक्षा अभ्यास महत्वपूर्ण उपलब्धि

बंगाल की खाड़ी में क्षेत्रीय सहयोग और सुरक्षा मजबूत होगी
बंगाल की खाड़ी में बिम्सटेक देशों के पहले समुद्री सुरक्षा अभ्यास के दौरान लिया गया सामूहिक छायाचित्र।
बंगाल की खाड़ी में बिम्सटेक देशों के पहले समुद्री सुरक्षा अभ्यास के दौरान लिया गया सामूहिक छायाचित्र।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम -- बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सहयोग, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में ‘बिम्सटेक’ देशों का पहला समुद्री सुरक्षा अभ्यास एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

‘बिम्सटेक’ बंगाल की खाड़ी से जुड़े 7 देशों का एक क्षेत्रीय समूह है, जिसका पूरा नाम 'बे ऑफ़ बंगाल इनिशिएटिव फ़ॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन' है।

इस अभ्यास में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड सहित ‘बिम्सटेक’ के सभी सदस्य देश भाग ले रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा से जुड़े सहयोग को बढ़ावा देना, आपसी समन्वय को मजबूत करना तथा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाना है।

यह अभ्यास ‘बिम्सटेक’ के छठे शिखर सम्मेलन के परिणामों और उसके प्रमुख विषय समृद्ध, लचीला एवं खुला बिम्सटेक की भावना पर आधारित है। इसके माध्यम से सदस्य देशों के बीच समुद्री सहयोग को व्यावहारिक रूप देने तथा विभिन्न क्षेत्रों में आपसी संपर्क और परिचालन संबंधों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल केवल साझा दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संयुक्त कार्रवाई और सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

बंगाल की खाड़ी दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्गों का क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना तथा सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना आवश्यक है।

इस अभ्यास के माध्यम से सदस्य देशों की समुद्री परिचालन क्षमताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने, समुद्री गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा आपसी समन्वय तंत्र को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, विभिन्न देशों के बीच अनुभवों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे समुद्री क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली विभिन्न चुनौतियों का सामूहिक रूप से सामना करने की क्षमता विकसित करने में सहायता मिलेगी।

इस महत्वपूर्ण अभ्यास में अंडमान तथा निकोबार द्वीपसमूह की सामरिक स्थिति और अंडमान तथा निकोबार कमान की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया गया है। अंडमान तथा निकोबार कमान भारत की पहली त्रि-सेवा कमान है, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना की संयुक्त क्षमताएं शामिल हैं। बंगाल की खाड़ी में महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के निकट स्थित होने के कारण इस कमान की भूमिका क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

समुद्री निगरानी, मानवीय सहायता, आपदा राहत, खोज एवं बचाव अभियान तथा क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े कार्यों में अंडमान तथा निकोबार कमान की क्षमताएं इसे बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार बनाती हैं। इसकी भौगोलिक स्थिति और परिचालन क्षमताएं न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करती हैं, बल्कि क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

‘बिम्सटेक’ सदस्य देशों के इस पहले समुद्री सुरक्षा अभ्यास के माध्यम से एक सुरक्षित, खुला और समावेशी समुद्री क्षेत्र बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया जा रहा है। यह अभ्यास साझा समुद्र, साझा सुरक्षा और साझा समृद्धि की भावना को आगे बढ़ाता है। इसके माध्यम से क्षेत्रीय एकजुटता, आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूत करने के साथ बंगाल की खाड़ी में शांति, स्थिरता और सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयासों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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