अंडमान मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने कुन्नूर स्थित पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का किया दौरा

रेबीज रोकथाम और वैक्सीन अनुसंधान पर मिली जानकारी
अंडमान मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने कुन्नूर स्थित पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का किया दौरा
Published on

सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजयपुरम : अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह से गए मीडिया प्रतिनिधियों के एक दल ने 12 मार्च को तमिलनाडु के कुन्नूर स्थित ऐतिहासिक पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया का दौरा किया। यह अध्ययन यात्रा संस्थान के वैक्सीन अनुसंधान, निर्माण तथा रोग रोकथाम से जुड़े कार्यों को समझने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को संस्थान की वैज्ञानिक गतिविधियों और देश में वैक्सीन विकास में उसके लंबे योगदान के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। दौरे के दौरान संस्थान के अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को अपने अनुसंधान कार्यक्रमों, वैक्सीन निर्माण की प्रक्रियाओं तथा विभिन्न संक्रामक रोगों के लिए वैक्सीन उत्पादन में निभाई गई भूमिका के बारे में जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के निदेशक डॉ. एस. शिवकुमार और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ भी बातचीत की, जिन्होंने बताया कि पहले के समय में वैक्सीन किस प्रकार तैयार किए जाते थे और आने वाले वर्षों में संस्थान अपनी निर्माण क्षमता को किस तरह बढ़ाने की योजना बना रहा है। इस दौरान बातचीत में रेबीज रोग पर भी विशेष चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि रेबीज एक वायरल बीमारी है जो सभी गर्म रक्त वाले जानवरों को प्रभावित कर सकती है और मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों की लार के माध्यम से फैलती है, विशेषकर कुत्तों के काटने से। उन्होंने बताया कि जब रेबीज वायरस शरीर में प्रवेश करता है तो वह तंत्रिका तंत्र के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचता है और वहां तेजी से फैलकर तंत्रिका ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है। एक बार केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित हो जाने के बाद जीवित रहने की संभावना बहुत कम रह जाती है, इसलिए समय पर उपचार और रोकथाम अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की स्थिति पर भी चर्चा की और बताया कि अब तक यहां रेबीज का कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने सलाह दी कि द्वीपों को रेबीज मुक्त बनाए रखने के लिए सख्त सावधानियां बरतना जरूरी है। उनके अनुसार मुख्यभूमि से लाए जाने वाले किसी भी जानवर, विशेषकर कुत्ते और बिल्लियों को द्वीपों में प्रवेश देने से पहले उनका वैक्सीनेशन सुनिश्चित किया जाना चाहिए और मान्यता प्राप्त संस्थानों से जारी वैध टीकाकरण प्रमाणपत्र की जांच भी की जानी चाहिए। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि किसी जानवर के काटने की स्थिति में तुरंत प्राथमिक उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। घाव को पर्याप्त पानी से अच्छी तरह धोना और तुरंत चिकित्सकीय सहायता प्राप्त कर एंटी-रेबीज उपचार शुरू करना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है। तमिलनाडु के कुन्नूर में स्थित पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देश के प्रमुख सरकारी संस्थानों में से एक है, जो वैक्सीन अनुसंधान और उत्पादन के क्षेत्र में कार्य करता है। यह संस्थान भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था के रूप में कार्य करता है और कई दशकों से विभिन्न वैक्सीन के विकास और आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1907 में पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ साउदर्न इंडिया के रूप में हुई थी। इसकी स्थापना उस समय की गई जब एक युवती को समय पर एंटी-रेबीज उपचार नहीं मिल पाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। समय के साथ इस संस्थान ने वैक्सीन अनुसंधान और निर्माण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिनमें एंटी-रेबीज वैक्सीन, इन्फ्लुएंजा वैक्सीन और ओरल पोलियो वैक्सीन का उत्पादन शामिल है। वर्ष 2001 में संस्थान ने मानव उपयोग के लिए वीरो सेल से तैयार शुद्ध रेबीज वैक्सीन विकसित की, जिससे देश में रेबीज वैक्सीन की लागत को कम करने में काफी मदद मिली। ऐसा करने वाला यह भारत का पहला सरकारी नियंत्रित संस्थान बना। आज यह संस्थान डीपीटी समूह की वैक्सीन के उत्पादन के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है और इसकी उत्पादन क्षमता लगभग 130 मिलियन डोज तक है। इसके प्रयोगशालाओं में बड़े पैमाने पर वैक्सीन उत्पादन और अनुसंधान के लिए उन्नत तकनीक और उपकरण उपलब्ध हैं।


संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in