तीन से चार महीने बाद गैस मिलने पर दो सिलेंडरों की मांग जायज: बसंती देवी

पुलिस और महिलाओं के बीच टकराव पर जताई गहरी नाराजगी
पहलगांव क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य बसंती देवी।
पहलगांव क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य बसंती देवी।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम – पहलगांव क्षेत्र की जिला परिषद सदस्य बसंती देवी ने रेस्ट कैंप क्षेत्र में रसोई गैस सिलेंडरों की अनियमित आपूर्ति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तीन से चार महीने के लंबे अंतराल के बाद गैस सिलेंडर पहुंचने पर महिलाओं द्वारा दो सिलेंडरों की मांग करना पूरी तरह जायज था। उन्होंने कहा कि जब लोगों को नियमित रूप से गैस की आपूर्ति नहीं हो रही है और कई महीनों के इंतजार के बाद सिलेंडर मिल रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में महिलाओं की परेशानी और उनकी मांग को समझना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि रेस्ट कैंप क्षेत्र में पिछली बार 31 जुलाई को रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति की गई थी, जबकि अगली आपूर्ति सीधे 2 नवंबर को हुई। इस लंबे अंतराल के बाद जब गैस वाहन पहुंचा तो महिलाओं ने दो सिलेंडर देने की मांग रखी थी। उनका कहना था कि तीन से चार महीने तक गैस की आपूर्ति नहीं होने के कारण एक सिलेंडर से परिवारों की जरूरतें पूरी करना संभव नहीं है। ऐसे में महिलाओं ने स्पष्ट किया था कि उन्हें दो सिलेंडर दिए जाएं, तभी वे सिलेंडर लेकर जाएंगी।

बसंती देवी ने कहा कि गैस वितरण प्रबंधन की ओर से महिलाओं को केवल एक सिलेंडर देने की बात कही गई और यह बताया गया कि उन्हें एक ही सिलेंडर वितरित करने का निर्देश मिला है। इसी बात को लेकर महिलाओं में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि हर एक या दो महीने में नियमित रूप से गैस की आपूर्ति होती रहती तो महिलाओं को दो सिलेंडरों की मांग करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। लेकिन जब तीन से चार महीने के बाद गैस पहुंचती है, तो एक सिलेंडर से इतने लंबे समय तक परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

जिला परिषद सदस्य ने गैस उपभोक्ताओं को मिलने वाले वार्षिक सिलेंडरों के कोटे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को एक वर्ष में नौ सिलेंडर मिलने का प्रावधान है, लेकिन लोगों की शिकायत है कि कई बार चार सिलेंडर मिलने के बाद ही वर्ष समाप्त हो जाता है। ऐसे में शेष सिलेंडरों की आपूर्ति कहां जाती है, यह सवाल उठाना उपभोक्ताओं का अधिकार है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की मांग के पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी, बल्कि वे अपनी वास्तविक परेशानी प्रशासन और संबंधित विभाग के सामने रखना चाहती थीं।

रेस्ट कैंप में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और महिलाओं के बीच हुई झड़प पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए बसंती देवी ने कहा कि इस तरह का टकराव नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि पुलिस को भी महिलाओं की मजबूरियों और उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने की जरूरत थी। जब महिलाएं लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान हों और अपनी मांगों को लेकर सामने आई हों, तो उनके साथ संवेदनशीलता से पेश आना चाहिए था। उन्होंने कहा कि महिलाओं और पुलिस के बीच जिस तरह की स्थिति पैदा हुई, उससे बचा जा सकता था। यह किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की परेशानी है।

उन्होंने कहा कि उत्तर एवं मध्य अंडमान के लोगों को लंबे समय से कई बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग की खराब स्थिति इसका एक बड़ा उदाहरण है। पिछले छह-सात वर्षों से लोग सड़क की बदहाली से जूझ रहे हैं। शुष्क मौसम में सड़कों से उड़ने वाली धूल के कारण लोगों का घरों में रहना तक मुश्किल हो जाता है, जबकि वर्षा ऋतु में सड़कों पर कीचड़ और जलभराव के कारण वाहनों का आवागमन भी कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों का सामना विशेष रूप से उत्तर एवं मध्य अंडमान के लोगों को करना पड़ रहा है और उनकी समस्याओं का अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

बसंती देवी ने क्षेत्र में खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पहले लोग लकड़ी का उपयोग करते थे, लेकिन अब वन विभाग से लकड़ी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वहीं, मिट्टी के तेल और अन्य ईंधन की भी नियमित उपलब्धता नहीं है। बिजली की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है और कई बार बिजली नहीं रहने के कारण लोगों को खाना पकाने में परेशानी होती है। यदि बिजली से खाना बनाया भी जाता है, तो अधिक बिजली खपत के कारण लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। ऐसे में रसोई गैस की अनियमित आपूर्ति ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की महिलाएं बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकलकर काम करती हैं और उनके लिए समय पर खाना पकाने की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। इसलिए गैस की आपूर्ति में होने वाली देरी का सीधा असर उनके दैनिक जीवन पर पड़ता है। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की कि रेस्ट कैंप सहित उत्तर एवं मध्य अंडमान के सभी क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नियमित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि हर एक या दो महीने में लगातार एक-एक सिलेंडर भी उपलब्ध कराया जाता है, तो लोग उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। लेकिन तीन से चार महीने तक इंतजार कराने के बाद केवल एक सिलेंडर देना किसी भी परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है।

अंत में उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए रसोई गैस आपूर्ति व्यवस्था में जल्द सुधार करेगा, ताकि क्षेत्र की महिलाओं और आम जनता को दोबारा इस तरह के विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर न होना पड़े।

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