जीबी पंत अस्पताल का आधुनिकीकरण प्राथमिकता, 30 अक्टूबर को जनता दर्शन

डायलिसिस सुविधा, सस्ती बिजली पर भी जोर
फोटो में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डॉक्टर दिनेश शर्मा।
फोटो में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल डॉक्टर दिनेश शर्मा।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम -- उपराज्यपाल डॉक्टर दिनेश शर्मा ने स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण, बेहतर डायलिसिस सुविधाओं, जन शिकायतों के निवारण और सस्ती ऊर्जा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में चिह्नित किया है। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अगला जनता दर्शन 30 अक्टूबर को सुबह 10 बजे आयोजित किया जाएगा।

कल बृंदाबन के दौरे के दौरान निवासियों को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि प्रशासन आवश्यक कार्यों को समय पर पूरा करने, गुणवत्ता बनाए रखने और जन कल्याण से सीधे जुड़ी परियोजनाओं में देरी रोकने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

द्वीपों के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉक्टर शर्मा ने कहा कि जी.बी. पंत अस्पताल का आधुनिकीकरण उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा। उन्होंने इलाज के लिए मरीजों को मुख्य भूमि के शहरों में जाने की मजबूरी और इससे परिवारों, विशेषकर विशेष उपचार की आवश्यकता वाले परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ पर चिंता जताई।

केंद्र शासित प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं में सुधार की अपनी सोच सामने रखते हुए उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि ऐसी स्थिति बने, जिसमें हमारे द्वीपों के मरीजों को यहां सुविधाएं न होने के कारण इलाज के लिए चेन्नई जाना पड़े। कोई भी मरीज आवश्यक उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए।"

उपराज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में कमियों का आकलन करने के लिए उन्होंने शहीद द्वीप सहित द्वीप समूह के विभिन्न स्थानों के अस्पतालों का दौरा किया है। उन्होंने दस डायलिसिस बिस्तरों और मशीनों सहित अतिरिक्त डायलिसिस ढांचे तथा मरीजों और उनके परिचारकों के लिए बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता का उल्लेख किया।

उन्होंने जी.बी. पंत अस्पताल में मरीजों के साथ आने वाले लोगों के लिए बैठने और ठंडक की पर्याप्त व्यवस्था की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि अपने परिजनों की देखभाल कर रहे परिचारकों को असुविधाजनक परिस्थितियों में परेशान नहीं होना चाहिए।

डॉक्टर शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध होनी चाहिए और चेतावनी दी कि यदि दवाओं की कमी के कारण मरीजों को बाहर की दुकानों से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा तो कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रशासन चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगा कि मरीजों को अनावश्यक कठिनाई के बिना आवश्यक उपचार मिल सके।

अगले जनता दर्शन की घोषणा करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि निवासी ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे और अपनी शिकायतों व अनुरोधों का ब्योरा देते हुए आवेदन जमा कर सकेंगे।

यह कार्यक्रम 30 अक्टूबर को सुबह 10 बजे निर्धारित है। डॉक्टर शर्मा ने कहा कि जनसंवाद को व्यवस्थित करने और वास्तविक शिकायतों पर ध्यान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।

उन्होंने राजनीतिक दलों और उनके वरिष्ठ प्रतिनिधियों से भी अपील की कि वे निवासियों को इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को एक परिवार बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन विभिन्न समुदायों और भाषाई पृष्ठभूमि के लोगों के साथ समान व्यवहार करेगा।

अंग्रेजी में आवेदनों का स्वागत करते हुए डॉक्टर शर्मा ने निवासियों को यथासंभव हिंदी में अपनी शिकायतें प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अंग्रेजी या बांग्ला, तमिल, मलयालम और कन्नड़ जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन चाहते हैं कि लोग हिंदी से भी जुड़ाव बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि आवेदकों को अपने आवेदन का अनुवाद करने में तकनीक मदद कर सकती है और दोहराया कि अंग्रेजी में आवेदन भी स्वीकार किए जाएंगे।

उपराज्यपाल ने द्वीपों में बिजली उत्पादन की ऊंची लागत पर भी चिंता जताई और डीजल आधारित बिजली उत्पादन पर होने वाले खर्च तथा इससे सार्वजनिक संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ का उल्लेख किया।

उन्होंने सौर ऊर्जा और बायोगैस सहित वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया और अधिकारियों से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों की जांच करने को कहा।

लगभग 33 मेगावाट की एक प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजना और लगभग 50 मेगावाट के एक व्यापक प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए उन्होंने उचित योजना और आकलन की आवश्यकता बताई।

डॉक्टर शर्मा ने सार्वजनिक कार्यों में देरी पर भी चिंता जताई और ऐसे मामलों का उल्लेख किया, जिनमें कथित तौर पर ठेकेदार बार-बार समय-सीमा बढ़ाए जाने के बाद परियोजनाएं अधूरी छोड़कर चले गए।

उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी खराब निष्पादन या लंबी देरी का बहाना नहीं बननी चाहिए और जोर दिया कि सार्वजनिक परियोजनाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरें और निर्धारित समय-सीमा में पूरी हों।

उपराज्यपाल ने इस बात पर भी जोर दिया कि द्वीपों में पैदा होने वाले रोजगार के अवसरों का लाभ स्थानीय निवासियों को मिलना सुनिश्चित किया जाए।

उनके वक्तव्य ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, सार्वजनिक जवाबदेही, सस्ती ऊर्जा और स्थानीय रोजगार को प्रशासन की घोषित प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा, जबकि कई प्रस्तावित पहलों को आगे के आकलन और आधिकारिक निर्णयों पर छोड़ दिया गया।

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