मध्य अंडमान के पहलगांव में अचानक भारी जलभराव से वन नर्सरी और मकानों को नुकसान

पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा से नाले में बढ़ा पानी
पहलगांव में अचानक भारी जलभराव से प्रभावित वन नर्सरी और मकानों का दृश्य।
पहलगांव में अचानक भारी जलभराव से प्रभावित वन नर्सरी और मकानों का दृश्य।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम -- उत्तर एवं मध्य अंडमान जिले के पहलगांव इलाके के कुछ हिस्सों में 22 अक्टूबर को पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक हुई भारी वर्षा के कारण बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। इस दौरान पानी कई घरों में घुस गया और वन विभाग की एक बड़ी नर्सरी को काफी नुकसान पहुंचा। यह घटना वन नर्सरी क्षेत्र में हुई, जहां वर्षा के अतिरिक्त पानी का बहाव एक छोटे नाले की क्षमता से अधिक हो जाने के कारण आसपास के इलाकों में पानी फैल गया।

आज सन्मार्ग संवाददाता से बातचीत करते हुए पहलगांव ग्राम पंचायत के प्रधान शिवानंद बैरागी ने बताया कि अचानक पानी का बहाव बढ़ने से गांव के वार्ड संख्या 5 और 6 प्रभावित हुए। उन्होंने पुष्टि की कि चार परिवारों के घरों में पानी घुस गया, जिससे कुछ नुकसान हुआ है। हालांकि, किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

बैरागी ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में असाधारण रूप से भारी वर्षा होने के कारण अचानक पानी का बहाव बढ़ गया और अपेक्षाकृत छोटे नाले में इतनी बड़ी मात्रा में पानी समाहित नहीं हो सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाले में किसी विशेष प्रकार की रुकावट नहीं थी, बल्कि वर्षा के पानी की मात्रा उसकी क्षमता से अधिक हो जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।

उन्होंने आगे बताया कि प्रभावित क्षेत्र में स्थित वन विभाग की केंद्रीय नर्सरी को काफी नुकसान पहुंचा है। बड़े क्षेत्र में फैली यह नर्सरी इस घटना के दौरान सबसे अधिक प्रभावित स्थानों में शामिल रही।

प्रधान के अनुसार, पहलगांव के कुछ हिस्सों, विशेषकर वार्ड संख्या 7 और 8 में, बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या सामने आती रहती है। हालांकि, वर्तमान समय में वार्ड संख्या 5 और 6 में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न होना असामान्य है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में इसी अवधि के दौरान प्रभावित इलाके में ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली थी।

बैरागी ने बताया कि इस तरह की घटनाएं हर साल नहीं होती हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक हुई तीव्र वर्षा ही पानी के तेज बहाव का मुख्य कारण रही। उन्होंने यह भी कहा कि उनसे बातचीत के समय तक पोक्काडेरा क्षेत्र अथवा मायाबंदर के अन्य आसपास के इलाकों से इसी प्रकार के भारी जलभराव की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई थी।

इस घटना ने एक बार फिर निचले इलाकों और छोटे जलनिकासी नालों की संवेदनशीलता को उजागर किया है। विशेष रूप से जब पहाड़ी क्षेत्रों से वर्षा का पानी तेजी से नीचे की ओर बहता है, तब सीमित क्षमता वाले नालों के कारण अचानक बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में जलनिकासी व्यवस्था की क्षमता और भारी वर्षा के दौरान पानी के बहाव पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता सामने आई है।

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