उपराज्यपाल ने दीपावली पर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के निर्देश दिए

अधिक कीमत वसूलने वालों पर कार्रवाई, मिलावट रोकने पर जोर
फोटो में दीपावली के मद्देनजर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण और मिलावट रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश देते हुए उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा।
फोटो में दीपावली के मद्देनजर आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण और मिलावट रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश देते हुए उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा।
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सन्मार्ग संवाददाता

श्री विजय पुरम --

अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल श्री डॉक्टर दिनेश शर्मा ने दीपावली के मद्देनजर बाजार में आतिशबाजी, खाद्य सामग्री तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए आज संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्धारित दरों से अधिक कीमत वसूलने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई करने, बाजार में नियमित निरीक्षण करने तथा व्यापारी संघों के साथ बैठकें आयोजित कर उचित मूल्य व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उपराज्यपाल ने मिठाइयों में मिलावट की रोकथाम और खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया।

लोक निवास, श्री विजय पुरम में आयोजित बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने संबंधित अधिकारियों को त्योहार के समय बाजार में वस्तुओं की कीमतों और गुणवत्ता पर निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दीपावली के दौरान आतिशबाजी, मिठाइयों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को अनुचित कीमतों और मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचाने के लिए संबंधित विभागों को सतर्क रहना चाहिए। नियमित निरीक्षण के माध्यम से बाजार की स्थिति पर नजर रखी जानी चाहिए तथा निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

उपराज्यपाल के ये निर्देश ऐसे समय में आए हैं, जब दीपावली से पहले द्वीपसमूह में पटाखों की कथित रूप से अत्यधिक कीमतों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता श्री चंदन सिंह और श्री संदीप सिंह ने भी चिंता जताई थी। दोनों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उपराज्यपाल से हस्तक्षेप करने और पटाखों की कीमतों में कथित अंतर की जांच कराने का आग्रह किया था। उन्होंने दावा किया था कि मुख्यभूमि के चेन्नई जैसे शहरों में लगभग 200 रुपये में मिलने वाले पटाखे द्वीपसमूह में 2,000 से 2,500 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में कीमत 3,000 रुपये तक बताई गई थी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पटाखों की खरीद लागत, परिवहन खर्च, बिक्री केंद्रों के आवंटन और मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराने की मांग उठाई थी। उनका कहना था कि कीमतों में कथित अंतर के कारण मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मुख्यभूमि और द्वीपसमूह में प्रचलित कीमतों की तुलना करने तथा उपभोक्ताओं को उचित दरों पर पटाखे उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया था।

अब उपराज्यपाल द्वारा दीपावली के दौरान आतिशबाजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखने के निर्देश दिए जाने से बाजार की निगरानी और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा का विषय फिर चर्चा में आ गया है।

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