

अंजलि भाटिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की पहचान हमेशा से शौर्य, पराक्रम और बलिदान से रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित पराक्रम दिवस समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी ऐतिहासिक और प्रेरणादायक विरासत के कारण इस वर्ष पराक्रम दिवस का मुख्य आयोजन अंडमान-निकोबार में किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान की धरती स्वतंत्रता संग्राम के अमर अध्यायों की साक्षी रही है। यहां की सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर जैसे असंख्य देशभक्तों ने अमानवीय यातनाएं सहीं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस से इस भूमि का गहरा संबंध रहा है, जिसने पराक्रम दिवस के आयोजन को और भी विशेष बना दिया है। उन्होंने कहा कि अंडमान की धरती इस विश्वास का प्रतीक है कि स्वतंत्रता का विचार कभी समाप्त नहीं होता। कितनी ही यातनाओं और बलिदानों के बावजूद आज़ादी की चिंगारी बुझने के बजाय और प्रखर होती चली गई।
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 30 दिसंबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में अंडमान की धरती पर पहली बार भारत का तिरंगा फहराया गया था। यह स्वतंत्र भारत के पहले सूर्योदय का प्रतीक था। इस ऐतिहासिक घटना के 75 वर्ष पूरे होने पर 30 दिसंबर 2018 को उन्हें उसी स्थान पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि समुद्र तट पर तेज हवाओं में लहराता तिरंगा मानो यह संदेश दे रहा था कि असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के सपने साकार हो गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज़ादी के बाद भी अंडमान-निकोबार लंबे समय तक गुलामी की पहचान से जुड़ा रहा। द्वीपों के नाम अंग्रेज़ अधिकारियों पर थे, लेकिन उनकी सरकार ने इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त किया। पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर श्रीविजयपुरम किया गया, जो नेताजी की विजय का प्रतीक है। इसी तरह स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप और सुभाष द्वीप जैसे नाम रखे गए। वर्ष 2023 में अंडमान के 21 द्वीपों के नाम 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे गए। उन्होंने कहा कि आज अंडमान-निकोबार में गुलामी के नाम मिट रहे हैं और आज़ाद भारत की नई पहचान बन रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस न केवल आज़ादी की लड़ाई के महानायक थे, बल्कि वे स्वतंत्र भारत के दूरदर्शी स्वप्नदृष्टा भी थे। वे एक ऐसे आधुनिक भारत की कल्पना करते थे, जिसकी आत्मा उसकी प्राचीन चेतना से जुड़ी हो। इसी दृष्टि से लाल किले में नेताजी को समर्पित संग्रहालय बनाया गया, इंडिया गेट के पास उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित की गई और गणतंत्र दिवस परेड में आज़ाद हिंद फौज के योगदान को सम्मान दिया गया। इसके साथ ही सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी शुरू किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेताजी का सपना एक सशक्त राष्ट्र का था और आज 21वीं सदी का भारत उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत को नुकसान पहुंचाने वालों को उनके घर में घुसकर जवाब दिया गया। नेताजी के सशक्त भारत के विजन को आगे बढ़ाते हुए देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। पहले भारत हथियारों के लिए विदेशों पर निर्भर था, लेकिन आज रक्षा निर्यात 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। भारत में बनी ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी शक्ति के बल पर भारत अपनी सेनाओं का तेज़ी से आधुनिकीकरण कर रहा है।