

नयी दिल्लीः केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को शहरी सहकारी बैंकों के लिए दो मोबाइल एप्लिकेशन - ‘सहकार डिजी पे’ और ‘सहकार डिजी लोन’ - पेश किए। उन्होंने डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ती नकदी रहित अर्थव्यवस्था में इन बैंकों के अस्तित्व के लिए जरूरी बताया।
शहरी सहकारी बैंकों में सुधार का जिक्र
शहरी सहकारी ऋण क्षेत्र पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) और सहकारी ऋण समितियों को पेशेवर बनाने के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने इस क्षेत्र की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार की ओर इशारा किया, जहां पिछले दो वर्षों में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां 2.8 प्रतिशत से घटकर 0.6 प्रतिशत रह गई हैं।
शाह ने कहा, ‘‘एनपीए में अच्छा सुधार हुआ है। उनके संचालन और वित्तीय अनुशासन में सुधार हुआ है।’’ उन्होंने नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन कोऑपरेटिव बैंक्स एंड क्रेडिट सोसायटीज लिमिटेड (एनएएफसीयूबी) से आगे विस्तार करने का आग्रह किया।
प्रत्येक शहर में हो एक अतिरिक्त शहरी सहकारी बैंक
मंत्री ने एनएएफसीयूबी के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया कि पांच साल के भीतर दो लाख से अधिक आबादी वाले प्रत्येक शहर में कम से कम एक अतिरिक्त शहरी सहकारी बैंक स्थापित किया जाए। उन्होंने फेडरेशन से कहा कि सफल सहकारी ऋण समितियों को शहरी सहकारी बैंकों में बदलना चाहिए। शाह ने कहा, ‘‘डिजिटल भुगतान समय की मांग है। हम जानते हैं कि भुगतान के तरीके बदल गए हैं। डिजिटल भुगतान का चलन बढ़ रहा है, और अगर शहरी सहकारी बैंक इसके साथ तालमेल नहीं बिठा पाते हैं, तो वे इस दौड़ से बाहर हो जाएंगे।’’
1,500 बैंकों को जोड़ने का लक्ष्य
उन्होंने दो साल के भीतर 1,500 बैंकों को इस मंच से जोड़ने का लक्ष्य रखा। मंत्री ने जोर देकर कहा कि केवल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि ही राष्ट्रीय प्रगति का मापदंड नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, ‘‘जीडीपी में वृद्धि होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही आजीविका के विकल्प भी पैदा होने चाहिए, जो सहकारी बैंक कर सकते हैं।’ उन्होंने शहरी सहकारी बैंकों से युवा उद्यमियों और आर्थिक रूप से वंचितों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।