नेपाल में तबाही के बीच अपनों की तलाश, मलबे में जिंदगी खोज रहे परिजन

परिजन अस्पतालों के बाहर जुटकर घायलों की सूची और तस्वीरों में अपने रिश्तेदारों को खोज रहे
Amidst the devastation in Nepal, a search for loved ones; families are looking for signs of life in the rubble
मृतकों की लगी तस्वीर में अपनो की तलाश करते लोग
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काठमांडू : नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद तबाही का मंजर हर तरफ दिखाई दे रहा है। अस्पतालों के बाहर परिजन मृतकों की तस्वीरों में अपनों को तलाश रहे हैं, जबकि गांवों में लोग कीचड़ और मलबे के बीच अपनी बची-खुची संपत्ति खोज रहे हैं। बाढ़ में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। तेज बहाव के साथ आए पानी, मिट्टी और मलबे ने घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 163 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

अस्पतालों में तस्वीरों से अपनों की पहचान

लापता लोगों के परिजन अस्पतालों के बाहर जुटकर घायलों की सूची और तस्वीरों में अपने रिश्तेदारों को खोज रहे हैं। जीवित लोगों में नाम नहीं मिलने पर वे मृतकों की तस्वीरों वाली सूची देखते हैं। हर बीतते दिन के साथ उनके अपनों के लौटने की उम्मीद कमजोर होती जा रही है।

सुरंग में फंसे 350 लोग बचाए गए

बचाव दल बारिश और भारी मलबे के बीच लगातार अभियान चला रहे हैं। ऊपरी त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में बाढ़ के बाद 100 से अधिक लोग फंस गए थे। नेपाली सेना ने अब तक 350 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। गृहमंत्री सुदान गुरूंग ने रात में खुदाई मशीनों से मलबा हटाने के अभियान की निगरानी की।

गांवों में तबाही के बीच सामान तलाशते लोग

नुवाकोट जिले के देवीघाट गांव में लोग कई फीट मोटी कीचड़ और मलबे के बीच अपने सामान की तलाश करते नजर आए। बिजली के खंभे उखड़े पड़े हैं और कई वाहन मलबे में दबे हैं। एक व्यक्ति मलबे के बीच से गैस सिलेंडर निकालकर ले जाता दिखा, जबकि एक महिला अपने बच्चे को लेकर क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच से गुजरती नजर आई।

सेना के राहत शिविर बने सहारा

त्रिशूली में सेना का राहत शिविर प्रभावित लोगों के लिए बड़ा सहारा बना हुआ है। यहां बुजुर्गों और बच्चों की मदद की जा रही है तथा घायलों का उपचार किया जा रहा है। शिविरों में लापता, मृत और सुरक्षित निकाले गए लोगों की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। बचाव अभियान में 11,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी, जिनमें 5,000 से ज्यादा नेपाली सेना के जवान शामिल हैं, लगाए गए हैं। मौसम विभाग ने फिर बारिश की संभावना जताई है, जिससे बचाव अभियान और मुश्किल हो सकता है। इसके बावजूद प्रशासन का ध्यान लापता लोगों की तलाश, प्रभावितों की मदद और पुनर्वास पर केंद्रित है।

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