

यरुशलम : इजराइल के यरूशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद में ईद की नमाज अदा करने पहुंचे नमाजियों पर इजरायली फौज ने शुक्रवार को खदेड़ दिया। इस दौरान इस दौरान फौजियों से भिड़े कई नमाजी घायल हुए हैं। हालांकि किसी बड़े दुघटना की खबर नहीं आई है।
28 फरवरी से सील है मस्जिद
दरअसल, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद बीते 28 फरवरी से सुरक्षा कारणों का हवाला देकर इस मस्जिद को सील कर दिया गया था। आज ईद-उल-फितर के दिन मस्जिद परिसर में केवल वक्फ स्टाफ के 25 सदस्यों को प्रति शिफ्ट अंदर जाने की अनुमति दी गई है। आम मुसलमानों, फिलिस्तीनियों और अन्य लोगों के लिए प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है।
लाठी चार्ज, आंसू गैस के गोले दागे
इस बीच मनाही के बावजूद शुक्रवार को जब बड़ी संख्या में फलस्तीनी नागरिक इस मस्जिद में नमाज करने पहुंचे तो इजराइली बलों ने उन्हें रोक दिया। जिसके बाद कई नमाजियों ने मस्जिद परिसर के बाहर ही नमाज अदा किया। एक रिपोर्ट के अनुसार इस बीच भीड़ का एक हिस्सा इजराली बलों के साथ उलझ गया। उसके बाद इजराइली बलों ने उन्हें काबू करने के लिए लाठी चार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे।
फिलिस्तीनी प्रशासन ने की निंदा
फिलिस्तीनी प्रशासन और स्थानीय संगठनों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। जारी बयान में कहा गया है कि कब्जे वाले पूर्वी यरुशलम में स्थित इस पवित्र स्थल को बंद रखना एक खतरनाक कदम है।यह धार्मिक स्वतंत्रता का स्पष्ट उल्लंघन है और इससे क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।
अल-अक्सा मस्जिद का विवाद पुराना
दरअसल, मुस्लिम समुदाय अल-अक्सा मस्जिद को मक्का और मदीना के बाद तीसरा पवित्र स्थल मानता है। मुसलमान इसे हरम अल-शरीफ के नाम से भी बुलाते हैं। वहीं, इजरायल के यहूदियों के अलावा ईसाई भी इस जगह को अपने लिए पवित्र मानते हैं। मुसलमानों का मानना है कि पैगंबर मोहम्मद रात की यात्रा (अल-इसरा) के दौरान मक्का से चलकर अल-अक्सा मस्जिद आए थे और जन्नत जाने से पहले यहां रुके थे। आठवीं सदी में बनी यह मस्जिद पहाड़ पर स्थित है।